भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि गंगा सप्तमी के दिन माता गंगा स्वर्ग लोक से भगवान आशुतोष की जटाओं में आई थी। यह मां गंगा का जन्म दिन कहा जाता है। सतयुग की इस घटना को करोड़ों वर्ष बीत गए हैं। परंतु मां गंगा का जन्म दिन हरिद्वार में विशेष रूप से तीर्थ पुरोहितों के साथ उनके अनुयायी करोड़ों वर्षों से मनाते चले आ रहे हैं।
गंगा सप्तमी के दिन सात फल, सात प्रकार की मिठाइयां, सात वस्त्र, सात रंगों से गंगा जी की पूजा करना फलदायी होता है। दूध, दही, शहद, मिश्री, घी से गंगा जी का अभिषेक कर नारियल गंगा जी में अर्पण करने से मनोकामना पूर्ण होती है। गंगा जी की पूजा हरकी पैड़ी, कुशा घाट, कनखल तीन तीर्थों पर की जा सकती है। पूजन का समय एक बजे दोपहर से 2.30 दोपहर तक रहेगा।