याची श्रीगंगा सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने बताया कि इसमें तारीख लग चुकी है और हाईकोर्ट ने कुछ दस्तावेजों की जानकारी मांगी है। उन्होंने बताया कि दस्तावेज सभा अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपलब्ध कराएगी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा से 200 मीटर की परिधि से निर्माण हटाने के साथ ही किसी प्रकार के निर्माण पर रोक लगा दी थी।
इस आदेश के बाद शहर के बड़े रसूखदार बिल्डर, होटल, आश्रमधारी लॉबी परेशान हो गई थी। शासनादेश जारी होने के बाद यह चर्चा होती रही है कि इन सबने मिलकर हाईकोर्ट और एनजीटी का आदेश फ्रिज कराने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत पर दबाव बनाकर गंगा को नहर घोषित करवा दिया था।