गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के पावन पर्व और इस दिन पड़ रहे संपूर्ण दस योगों में पावन स्नान करने हरिद्वार में हर की पैड़ी सहित सभी घाटों पर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। गंगा स्नान सूर्योदय से पहले ही शुरू हो गया। बता दें कि सायंकाल तक गंगा स्नान होता रहेगा।
विज्ञापन
2 of 9
- फोटो : अमर उजाला
देश भर से आए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर मोक्ष की कामना की और दस तरह के पापों से मुक्त होने की कामना की। इस दौरान सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मेला क्षेत्र को सुपर जोन, जोन और सेक्टर में बांट कर पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात किए गए हैं।
विज्ञापन
3 of 9
- फोटो : अमर उजाला
वहीं इस बार की पवित्र डुबकी आनंद योग और हस्त नक्षत्र में लग रही है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा स्नान होता है। वहीं इसके अगले दिन यानी कल (गुरुवार) को निर्जला एकादशी का बड़ा स्नान होगा। चूंकि आज पूर्ण दशमी तिथि और सभी दस योग पूर्ण रूप में विद्यमान है, इसलिए स्नान का फल कई गुना मिलेगा।
4 of 9
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पोषक गंगा नदी का अवतरण दिवस ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। कई दशकों बाद इस वर्ष गंगा दशहरा पर हस्त नक्षत्र, बुधवार, व्यतिपात योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
विज्ञापन
5 of 9
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दिव्य संयोग की जोड़ी में गंगा स्नान, तप, दान मनोवांछित फल प्रदान करने वाला होगा। राजा भगीरथ के पुरखों को तारने के लिए भगवति गंगा युगों-युगों से प्राणी मात्र को जीवनदान के साथ ही मुक्ति भी देती आ रही है।
विज्ञापन
6 of 9
- फोटो : अमर उजाला
स्वर्ग लोक से देवी गंगा ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र, व्यतिपात योग, कन्या के चंद्र, वृष के रवि योग की साक्षी में पृथ्वी पर अवतरित हुई थी।
विज्ञापन
7 of 9
- फोटो : अमर उजाला
धर्मशास्त्रीय मान्यतानुसार इस बार कई दशकों बाद गंगा दशहरा पर 12 जून को यानी आज ठीक वैसे ही दिव्य महायोग बन रहे हैं, जिन योगों में देवी गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। इससे गंगा दशहरा पर्व की महत्ता और अधिक बढ़ गई है।
8 of 9
- फोटो : अमर उजाला
इन दुर्लभ योगों की जोड़ी से इस दिन स्नान, दान, जप, तप, व्रत और उपवास का बहुत महत्व है। गंगा दशहरा स्नान एवं दान के साथ ही तन-मन को शुद्ध करने का पर्व है।
ज्योतिषाचार्य भास्कर जोशी का कहना है कि विशिष्ट योग की साक्षी में गंगा माता का पूजन विशेष फल देने वाला होगा। कल्याण करने वाली माता के रूप में मां गंगा भारतीय संस्कृति की रीढ़ है।