गोबर और कच्ची मिट्टी से बने दियों की मांग भी बढ़ रही है। आठ से 13 इंच आकार की मूर्तियों की सबसे अधिक बिक्री हुई है। इन मूर्तियों को बनाने में महिलाओं ने गर्मियों के दौरान मेहनत की थी।
गणेश चतुर्थी के लिए गोबर और कच्ची मिट्टी से बनी पर्यावरण अनुकूल मूर्तियां खूब पसंद की जा रही हैं। स्वदेश कुटुंब समूह ने मूर्तियां तैयार की हैं। इनकी कीमत 500 से 1100 रुपये तक है।
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समूह की अध्यक्ष तृप्ति थापा ने बताया कि आठ से 13 इंच आकार की मूर्तियों की सबसे अधिक बिक्री हुई है। इन मूर्तियों को बनाने में महिलाओं ने गर्मियों के दौरान मेहनत की थी। गोबर और कच्ची मिट्टी से बने दियों की मांग भी बढ़ रही है। मूर्तियां प्राकृतिक रंगों से रंगी जाती हैं। ये रंग हल्दी, चुकंदर और रोली जैसी प्राकृतिक चीजों से खुद बनाए जाते हैं।
इन मूर्तियों की मांग देहरादून के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश और हल्द्वानी से भी है। समूह की महिलाएं कूरियर के माध्यम से इन्हें पहुंचा रही हैं। ये प्रतिमाएं पानी में आसानी से घुल जाती हैं। यह प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियों से अलग है, जो विसर्जन के समय नहीं घुलतीं।
जोधपुर के मूर्तिकार संजय राजपूत भी गणेश मूर्तियां तैयार करते हैं। वह पिछले 12 वर्षों से यह कार्य कर रहे हैं। पहले उनके पिता यह काम किया करते थे। अब संजय राजपूत इस पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
पर्यावरण अनुकूलता और प्राकृतिक रंग
इन मूर्तियों की मुख्य विशेषता इनका पर्यावरण अनुकूल होना है। ये गोबर और कच्ची मिट्टी जैसे प्राकृतिक तत्वों से बनी हैं। इनमें हल्दी, चुकंदर और रोली जैसे प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है। विसर्जन के समय ये पानी में आसानी से घुल जाती हैं। यह पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।