भारत-चीन सीमा के साथ नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट के बीच सीमा पर रसद और हथियारों को पहुंचाने का सिलसिला जारी है। सेना के वाहनों का काफिला रसद और कई प्रकार के शस्त्रों को लेकर मैदान से पहाड़ की तरफ रविवार को रवाना किया गया। भवाली में सैन्य गतिविधियों को देखकर लोगों ने अनुमान लगाया कि ये वाहन सीमा पर भेजे जा रहे हैं।
उत्तराखंड के कुमाऊं से नेपाल और चीन की सीमा लगती है। लद्दाख के गलवां घाटी में चीनी सेना की हरकत के बाद से उत्तराखंड से लेकर अरुणांचल प्रदेश से लगी चीन सीमा पर तनाव बढ़ गया है। चीन की किसी भी हरकत से निपटने के लिए भारतीय सेना सीमा पर पूरी तरह मुस्तैद है।
वहीं नेपाल सरकार की ओर से भारतीय क्षेत्र को नए नक्शे में दर्शाने के बाद नेपाल सीमा पर भी तनाव है। इसे देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर भी अलर्ट है। इधर, केंद्रीय खुफिया विभाग भी सक्रिय है। सोशल मीडिया पर आईबी निगरानी रख रही है।
उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने गलवां वैली में हुई हाल की घटना को चीन की छटपटाहट करार दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि चीन के साथ आर्थिक संबंधों पर पुनर्विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि चीन चारों तरफ से घिर चुका है। इसलिए अब वह ऐसा कायराना प्रयास कर रहा है। उन्होंने गलवां घाटी में शहीद हुए जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। कहा कि हमारे जवानों ने एक बार फिर यह साबित किया कि वे दुनिया की किसी भी चुनौती से निपट सकते हैं। हमारे जवान भले ही संख्या में चीन से बहुत कम थे लेकिन उन्होंने चीन की सारी अकड़ निकाल दी।
चीन को यह समझ लेना चाहिए कि भारत अब उसकी आंख में आंख मिलाकर बात कर सकता है। आज का भारत 1962 का भारत नहीं है। यह 2020 का सशक्त भारत है। आज भारत का नेतृत्व मजबूत हाथों में है। इसलिए चीन पुरानी गलतियों को दोहराने की भूल न करे। अगर चीन ऐसा करता है तो उसे हर बार मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।