विधानसभा सदन के आखिरी दिन उत्तराखंड सरकार द्वारा बिना चर्चा के 18 विधेयक पारित किए गए। इसके बाद अब मुख्यमंत्री हरीश रावत सदन में गैरसैंण का संकल्प रखेंगे। दूसरे दिन विपक्ष सदन से नदारद दिखा। बिना विपक्ष के ही सदन की कार्यवाही शुरू की गई।
गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दूसरे और आखिरी दिन सदन की कार्यवाही से पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मीडिया को संबोधित किया।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान वह गैरसैंण को जिला या राजधानी बनाने के मामले में कुछ नहीं बोले, लेकिन गैरसैंण के लिए कई घोषणाएं कर डाली। रावत ने कहा कि गैरसैंण में सड़क सुविधाएं विकसित होंगी।
उन्होंने कहा कि गैरसैंण के पास एक हवाई अड्डा बनेगा। यहां अवस्थापन निगम का गठन होगा। इस दौरान रावत ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह गैरसैंण के मुद्दे पर गंभीर नहीं है। मीडिया से मुखातिब होने के बाद सदन की दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू हुई।
इससे पहले गुरुवार को भराड़ीसैंण में निर्माणाधीन विधानसभा भवन में पहली बार शुरू हुए विशेष सत्र के पहले ही दिन राजधानी के मुद्दे पर विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया। वेल में नारेबाजी के बीच विपक्ष ने सवाल दागे कि सरकार गैरसैंण पर स्थिति साफ करे। नेता विपक्ष अजय भट्ट ने साफ किया सरकार गैरसैंण में राजधानी पर जो भी निर्णय लेगी, वह उसके साथ खड़े हैं।
इस बीच विपक्ष के शोर-शराबे और हंगामे के बीच सरकार अपना काम निपटाती रही। भोजनवकाश के बाद गैरसैंण के मसले पर सरकार से क्षुब्ध विपक्ष ने शेष सत्र का बायकाट कर दिया। इस बीच सरकार ने सदन में विपक्ष की अनुपस्थिति में कई विधेयक और संकल्प प्रस्ताव पास किए। सदन में 1507 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट भी पेश कर दिया गया।
राजधानी के मुद्दे पर भराड़ीसैंण विधानभवन में बृहस्पतिवार को हंगामे के साथ सत्र शुरू हुआ। विपक्ष के गैरसैंण को स्थायी या अस्थायी (ग्रीष्मकालीन) राजधानी घोषित करने की मांग के बीच पहले सत्र में जमकर हंगामा हुआ। सरकार विपक्ष के गैरसैंण पर स्थिति साफ करने से बचती दिखी। पीठ से आदेश के बाद विपक्ष प्रश्नकाल चलाने को राजी हो गया।
प्रश्न के संतोषजनक उत्तर न मिलने पर विपक्ष ने कुछ सेकंड के लिए सांकेतिक बहिर्गमन किया। शून्य काल में विपक्ष गैरसैंण पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग को लेकर अड़ा रहा। उधर, ट्रेजरी बेंच ने विपक्ष के वेल में हंगामे के बीच अपने आठ विधेयक पटल पर रख अपना बिजनेस निपटाया।