उत्तराखंड में फल उत्पादन बढ़े और इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हों, इसके लिए 10 लाख फलदार पौधे लगाए जाएंगे। उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने इस योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। पैदावार बढ़ने पर उसके विपणन को लेकर भी मंडी परिषद ने रोडमैप तैयार किया है।
मंडी परिषद के प्रबंध निदेशक धीराज सिंह गर्ब्याल के मुताबिक राज्य में जिस तरह फल उत्पादन की अपार संभावनाएं है उस हिसाब से न तो फलों का उत्पादन हो रहा है और न ही विपणन की माकूल व्यवस्था है। फल उत्पादन बढ़ाकर राज्य की वित्तीय स्थिति को और मजबूत किया जा सकता है। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
योजना के पहले चरण में पर्वतीय जिलों चमोली, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, पौड़ी में नाशपाती, सेब, अखरोट जैसे पौधों का वितरण शुरू किया गया है। मानसून के दौरान मैदानी जिलों हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर में पौधे वितरित किए जाएंगे। फलों के उत्पादन के बाद इनके विपणन की भी व्यवस्था की जाएगी। राज्य के तमाम इलाकों में छोटी-छोटी फल मंडियां स्थापित की जाएंगी, जिसका मसौदा तैयार कर लिया गया है।
कुमाऊं, गढ़वाल में लगेगी प्रोसेसिंग यूनिट
फलों के उत्पादन के बाद इनके उत्पाद बनाने के लिए कुमाऊं और गढ़वाल में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण में 12 करोड़ की लागत से कुमाऊं में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। इन यूनिटों में फलों से विनेगर समेत कई अन्य एफएमसीजी उत्पाद बनाए जाएंगे।