विधानसभा की भूमि की वनीय स्वीकृति नहीं मिली
विधानसभा के लिए जो भूमि प्रस्तावित थी, उसकी केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से स्वीकृति नहीं मिली। सैद्धांतिक स्वीकृति के बावजूद शासन से केंद्र को मांगी गई सूचना के आधार पर प्रस्ताव भेजने में बहुत देरी हो गई, जिसके चलते सैद्धांतिक स्वीकृति भी निरस्त हो गई। इस लेटलतीफी के चलते विधानसभा भवन बनाने की योजना लटक गई। अमर उजाला ने 21 अप्रैल को इलाका ही नहीं नए विधानसभा भवन का प्रोजेक्ट भी हुआ फ्रीज शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
ये भी पढ़ें...Pahalgam Terror Attack: दून घाटी का कश्मीर से मोहभंग, पहले जाने की थी बेकरारी, अब बुकिंग कैंसिल कराने को बेचैन
घर और व्यावसायिक भवन नहीं बना पा रहे स्थानीय लोग
फ्रीज जोन घोषित होने की वजह से क्षेत्र में स्थानीय लोग घर और व्यावसायिक भवन नहीं बना पा रहे हैं। इस संबंध में स्थानीय निवासी शांतनु ने मुख्यमंत्री से फ्रीज जोन हटाने का अनुरोध किया था। उनके मुताबिक, दो वर्ष में बालावाला, नकरौंदा, नथुवावाला, गुल्लरघाटी, हर्रावाला, कुआंवाला, रांझावाला के लोग अपनी जमीन होने के बावजूद उन पर निर्माण नहीं कर पा रहे हैं।