प्रदेश में चुनाव आचार संहिता से पहले आनन-फानन में नियमों को ताक पर रखकर अल्मोड़ा जिले के एक अशासकीय स्कूल में की गई 12 टीचरों की नियुक्ति नियम विरुद्ध पाए जाने पर जिलाधिकारी ने नियुक्तियों (समायोजन) को निरस्त करने की सिफारिश की है। आरोप है कि सहायक अध्यापक एलटी और प्रवक्ता के जिन पदों पर नियुक्तियों की गई उसमें प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया। सविन बंसल (जिलाधिकारी, अल्मोड़ा) के मुताबिक शिकायत मिलने पर प्रकरण की जांच कराकर इसे शासन को भेजा गया है।
अल्मोड़ा जिले का आर्य कन्या इंटर कॉलेज वर्ष 2014 में अनुदान में आया। जिसे वर्ष 2016 में वेतन अनुदान में लिया गया। स्कूल में छह प्रवक्ता एवं इतने ही सहायक अध्यापकों के पद सृजित किए गए, लेकिन इन पदों पर हुई नियुक्तियों में प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया। सूत्रों के मुताबिक प्रवक्ता और सहायक अध्यापक के पद पर हुई टीचरों की नियुक्तियां बैक डोर से की गई है। इसके लिए टॉप सेवन की मेरिट प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई।
स्कूल में जो टीचर थे, उनका समायोजन कर दिया गया। नियुक्तियों में गड़बड़ी की शिकायत पर जिलाधिकारी अल्मोड़ा सविन बंसल की ओर से मामले की जांच बैठाई गई। जिलाधिकारी के मुताबिक जिला स्तरीय तीन अधिकारियों की कमेटी बनाकर मामले की जांच कराई गई। जांच में शिकायत की पुष्टि हुई है। इसमें यह भी पाया गया है कि नियुक्तियों में उमा देवी वाद का घोर उल्लंघन किया गया है। वहीं स्कूल को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री की अलग-अलग घोषणाओं पर 20 लाख रुपये दिए गए थे। इससे प्रयोगशाला कक्ष एवं कुछ अन्य कार्य होना था, लेकिन इसमें भी वित्तीय अनियमितता मिली है।
गोपनीय रिपोर्ट है, जांच कमेटी ने विस्तृत जांच कर अपर मुख्य सचिव शिक्षा को रिपोर्ट भेज दी है। जांच में शिकायत की पुष्टि हुई है। अब शासन स्तर से इस पर निर्णय लिया जाना है।-सविन बंसल, जिलाधिकारी अल्मोड़ा
जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर कार्रवाई होगी, अभी मैं रिपोर्ट देख नहीं पाया हूं, रिपोर्ट देखने के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।-डॉ.रणवीर सिंह, अपर मुख्य सचिव
स्कूलों में टीचरों की नई नियुक्तियां नहीं की गई बल्कि समायोजन हुआ है, समायोजन नियमानुसार हुआ है, स्कूल को 2002 में वित्त विहीन, 2014 में वित्त की मान्यता मिली, 2015 में एक शासनादेश हुआ था इसी जीओ के अनुसार समायोजन किया गया।
-बिट्टू कर्नाटक, स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष