सावधान! यदि आप देहरादून में आशियाना बनाने के सपने को साकार करने के लिए जमीन खरीदने की तैयारी में हैं तो किसी तरह की जल्दबाजी न दिखाए।
खासतौर पर शहर के आउटर में। क्योंकि जमीन के नाम पर ठगी करने वालों की फौज इन इलाकों में सक्रिय है, जो उनके गाढे़ खून की कमाई को हड़पने में पल भर की भी देर नहीं करेगी। दस्तावेजों के फर्जीवाड़े का ऐसा जंजाल कि पढ़े लिखे तक मात खा जाएं। या यूं कहें कि मात खा रहे हैं। शहर के थानाक्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही इस तरह की शिकायतें इसकी गवाही देने के लिए काफी हैं।
राजधानी में आर्थिक अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। खासतौर जमीन के नाम पर हो रही धोखाधड़ी में सैकड़ों परिवारों के सपने टूटकर बिखर गए हैं। पुलिस चौकी से लेकर शासन के अफसरों तक शिकायतों का पुलिंदा है। भूमि घोटालों के लिए गठित एसआईटी ने अकेले 172 मामले शहर के विभिन्न थानों क्षेत्र में दर्ज कराए।
तीन सौ के करीब शिकायतें अब भी लंबित है। इसके अलावा बहुत सी शिकायतें थाना और सीओ स्तर पर जांच में उलझी हैं। छह माह के आंकड़ों पर नजर डाले तो साफ जाहिर होता है कि जमीन जालसाजी की अधिकांश घटनाएं शहर की बाहरी बस्तियों में हुई हैं।
कहीं फर्जी दस्तावेज बनाकर दूसरे की जमीन बेच दी गई तो कहीं एक ही जमीन के कई लोगों ने अनुबंध थमाकर मोटी रकम वसूल ली। सबसे ज्यादा पटेलनगर कोतवाली में 31, नेहरू कालोनी 18, प्रेमनगर 13 और रायपुर में 11 मामले दर्ज हुए हेँ। जालसाजों पर व्यापक स्तर पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन फर्जीवाड़े का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
आउटर कालोनियों में जमीनी फर्जीवाड़ों का ग्राफ बढ़ा है। थोड़ी सी सतर्कता से ऐसी ठगी से बचा जा सकता है। कागजातों को जांचे और परखे बिना किसी तरह की पेशगी न थमाएं। एसआईटी की जांच के बाद कई सौ जालसाज जेल गए। उस कार्रवाई का थोड़ा असर तो हुआ है, लेकिन अभी फर्जीवाड़े लगातार सामने आ रहे हैं।
- संजय गुंज्याल, पुलिस महानिरीक्षक (प्रभारी एसआईटी)
अमर उजाला अलर्ट
- जमीन अथवा प्लाट की सौदेबाजी से पहले स्थलीय निरीक्षण कर उस बाबत जानकारी हासिल कर ली जाए।
- विक्रेता की ओर से उपलब्ध कराने वाले जमीनी दस्तावेजों को राजस्व अभिलेखों से मिलान जरूर करा ले।
- जमीन का बारहा साला रिकार्ड का अवलोकन भी करा ले। इस अवधि में जमीन का मालिकाना हक किस-किस का रहा है।
- जमीन बेचने वाले शख्स की छवि के बारे में आसपास के लोगों से मंत्रणा कर ली जाए।
- शंका मिटाने के लिए क्षेत्रीय लेखपाल से भी जरूरी जानकारी हासिल कर ली जाए।
- जमीन का अनुबंध साधारण कागजों पर करने से परहेज करे। अधिकृत तरीके से ही अनुबंध करे।