सेना से रिटायर्ड अधिकारी से फ्यूचर इन्वेस्टमेंट प्लान के नाम पर एक जालसाज ने 11 लाख 24 हजार रुपये ठग लिए। बड़ी बात यह है कि इतनी मोटी रकम का निवेश सिर्फ मोबाइल पर हुई बातचीत पर किया गया है। पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
मोहकमपुर स्थित माजी माफी निवासी और आर्मी से सेवानिवृत्त सुनील सेमवाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि रिटायरमेंट के बाद फ्यूचर इन्वेस्टमेंट प्लान में इन्वेस्ट करने को कई मोबाइल नंबरों से उन्हें कॉल आया। इस पर विश्वास कर संबंधित लोगों के खाते में 11 लाख 24 हजार रुपये का निवेश किया गया। समयावधि पूरी होने के बाद फ्यूचर इन्वेस्टमेंट के कर्मचारियाें से रकम मांगी तो वे काफी दिनों से टाल-मटोल करते आ रहे हैं। शक पर इंटरनेट अथवा दूसरे माध्यमों से जानकारी की गई तो पता चला कि फ्यूचर इन्वेस्टमेंट के नाम से कोई प्लान बाजार में नहीं है। एसओ नेहरू कालोनी दिलबर नेगी ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। मोबाइल नंबर और खातों के माध्यम से ठगों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
फेसबुक पर विज्ञापन में आनलाइन स्कूटी बेचने के नाम पर ठगी
फेसबुक पर विज्ञापन के माध्यम से 27500 रुपये में स्कूटी खरीदने के नाम पर प्राइवेट कंपनी के अधिकारी से 92200 रुपये ठग लिए गए। आरोपी ने पहले खुद को सेना का जवान बताकर पीड़ित का विश्वास जीता था। रानी पोखरी निवासी गिरीश चंद भट्ट ने एसएसपी को शिकायती पत्र देकर बताया कि उन्होंने फेसबुक पर मार्केट पैलेस के विज्ञापन पर दिए गए नंबर पर कॉल की थी। कॉल रिसीव करने वाले ने खुद का नाम तेजस्वी चौहान बताया था। चौहान का कहना था कि वह आर्मी में जवान है। ट्रांसफर होने के कारण वह अपनी स्कूटी बेचना चाहते हैं।
भट्ट का विश्वास जीतने को चौहान ने अपना परिचय पत्र, आधार कार्ड और कैंटीन स्मार्ट कार्ड की कॉपी भेज दी। 27500 रुपये में स्कूटी का सौदा हुआ। पेशगी के रूप में 10 हजार रुपये पेटीएम के माध्यम से एक खाते में भेजे गए। बाकी 17500 रुपये लेने के बाद स्कूटी देहरादून के पते पर भेजने की बात कही गई। 28 जुलाई को आए शख्स ने खुद को सीआईएसएफ का जवान बताकर सिक्योरिटी के रुप में 15700 रुपये की मांग की है। कहा कि 15 हजार रुपये बाद में वापस कर दिए जाएंगे। इसी तरह कई बहाने से उनसे 92200 रुपये कई खाताें में स्थानांतरित करा लिए। बाद में मोबाइल बंद कर आरोपी गायब हो गया। एसएसपी से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर रकम वापस दिलाने की मांग की गई है।