एक जूनियर हाई स्कूल में नौकरी पाने के लिए इन शिक्षकों ने ऐसा जुगाड़ लगाया कि पुलिस को पता लगा तो वो भी सकते में आ गई। जांच टीम ने जब रिकॉर्ड खंगालने शुरु किए तो एक के बाद एक खुलासे हुए।
शिक्षा विभाग में फर्जी और अमान्य प्रमाण पत्रों से नियुक्तियों की जांच कर रही एसआईटी ने एक जूनियर हाईस्कूल में हिन्दी साहित्य सम्मेलन और भारतीय शिक्षा परिषद के अमान्य प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहे प्रधानाध्यापक समेत चार टीचरों के खिलाफ एफआईआर की सिफारिश की है।
साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी प्रभारी ने शिक्षा महानिदेशक से प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। इस अनुदानित स्कूल में ज्यादातर टीचर एक ही परिवार के हैं। नियुक्ति में नियमों की पूरी तरह से अनदेखी के साक्ष्य मिले हैं।
इस मामले में तत्कालीन अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। यह रिपोर्ट मिलने के बाद शिक्षा विभाग भी हरकत में आ गया है। अन्य 108 शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन पर भी तेजी से काम हो रहा है। आने वाले दिनों में फर्जी नियुक्तियों के कई मामले सामने आने के आसार हैं।
आगे जानिए क्या हुआ
जांच रिपोर्ट के मुताबिक इस स्कूल का नाम, सावित्री शिक्षा निकेतन जूनियर हाईस्कूल हर्रावाला है। इनमें प्रधानाध्यापक अजय सिंह, टीचर सुनीता सिंह और नीलम पांडे के शैक्षिक प्रमाण पत्र नौकरी के लिए अर्ह नहीं पाए गए। स्नातक शिक्षा के बाद इन तीनों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन की विशारद, बीटीसी परीक्षा के हैं।
बीएड की परीक्षा के प्रमाण पत्र भारतीय शिक्षा परिषद के हैं। ये प्रमाण पत्र उत्तराखंड में नौकरी के लिए मान्य नहीं हैं। नियुक्ति में भी तत्कालीन शिक्षाधिकारियों की मिलीभगत से नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है।
चौथे टीचर कौशलेंद्र सिंह बीपीएड डिग्रीधारी हैं। चूंकि जूनियर हाईस्कूलों में बीपीएड का पद ही नहीं है, लिहाजा इस नियुक्ति को भी अवैध माना गया है। नीलम पांड को छोड़कर तीनों टीचर निकट के रिश्तेदार भी हैं।
शासन के आदेश पर फर्जी प्रमाण पत्रों से नियुक्तियों के मामले की जांच कर रही एसआईटी की पहली रिपोर्ट में ही अमर उजाला की खबर पर मोहर लग गई। अमर उजाला ने ही फर्जी और अमान्य प्रमाण पत्रों से शिक्षकों की भर्ती का खुलासा किया था।
इसी मुहिम का संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। एसआईटी के पास प्रदेश भर से वर्ष भर्तियों में धांधली की शिकायत करने वालों की झड़ी लग गई। इनमें हर्रावाला के सावित्री शिक्षा निकेतन जूनियर हाईस्कूल में एक ही परिवार के लोगों को फर्जी तरीके से भर्ती करने की शिकायत भी थी।
सालों से चल रहा था ये काम
एसआईटी ने जांच में पाया कि 24 मई 2005 में स्कूल के अनुदान सूची में शामिल होने के बाद पूर्व से तैनात शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं कराया गया है। जिला शिक्षाधिकारी द्वारा सात सितंबर को उपलब्ध कराए गए पत्र में इन प्रमाण पत्रों के सत्यापन के संबंध में एसआईटी को कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया है। अनुदान सूची में शामिल होने के बाद शासन के निर्धारित मानकों और प्रक्रिया की अनदेखी की गई है।
एसआईटी प्रभारी और सीबीसीआईडी की अपर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे द्वारा शिक्षा महानिदेशक को भेजी गई संस्तुति में कहा गया है कि स्कूल के प्रबंध तंत्र ने अपने परिचितों और एक ही परिवार के सदस्यों की नियुक्ति के लिए अनुमोदन कर शिक्षा विभाग को भेजा। तत्कालीन शिक्षा विभाग में नियुक्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूलों में अपात्र शिक्षकों का अनुमोदन कर दिया गया।
शासन के आदेश के अनुपालन में फर्जी प्रमाण पत्रों से नियुक्तियों की जांच विचाराधीन है। संबंधित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने की प्रक्रिया चल रही है। सावित्री शिक्षा निकेतन जूनियर हाईस्कूल हर्रावाला में चार अपात्र लोगाें की शिक्षक पद पर नियुक्ति के मामले में प्राथमिक दर्ज कराने की सिफारिश शिक्षा महानिदेशक को भेजी गई है।
-श्वेता चौबे, प्रभारी एसआईटी, एएसपी सीबीसीआईडी
एफआईआर दर्ज कराने के लिए एसआईटी की सिफारिश प्राप्त हुई है। महानिदेशक को इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं।
चंद्रशेखर भट्ट, सचिव, विद्यालीय शिक्षा