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Dehradun News: अंतरराज्यीय चोर गिरोह के चार नेपाली सदस्य धरे, मुखिया फरार

Tue, 18 Aug 2026 01:50 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
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कोतवाली क्षेत्र के लक्ष्मणपुर स्थित न्यू राणा ज्वेलर्स में हुई सेंधमारी का पुलिस ने सोमवार को पर्दाफाश कर दिया। पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने कुल्हाल हाईवे पुल के पास से अंतरराज्यीय गिरोह के चार शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी मूल रूप से नेपाल के रहने वाले हैं और घटना के बाद नेपाल भागने की फिराक में थे। इनके कब्जे से करीब पांच लाख रुपये की सोने-चांदी की ज्वेलरी बरामद हुई है, जबकि गिरोह का मास्टरमाइंड भीम बहादुर शाही अभी फरार है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राजीव रौथाण ने बताया कि सात अगस्त की रात चोरों ने शटर का कुंडा तोड़कर ज्वेलरी शॉप से सोने-चांदी के आभूषणों पर हाथ साफ किया था। नौ अगस्त को इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान सूचना पर रविवार रात टीम ने कुल्हाल हाईवे पुल के पास कच्चे रास्ते से चार संदिग्धों को धर दबोचा। पूछताछ में उन्होंने अपने फरार साथी भीम बहादुर (निवासी तोलीचाखा पीपलकोट, नेपाल) के साथ मिलकर सेंधमारी की बात कबूल कर ली। हालांकि, दुकान संचालक कार्तिक राणा ने 10 से 12 किलो चांदी, 25 ग्राम सोना और 14 हजार रुपये की नकदी चोरी होने का दावा करते हुए कहा है कि पुलिस महज 15 फीसदी सामान ही बरामद कर पाई है। पुलिस का कहना है कि दर्ज प्राथमिकी में चोरी गए सामान का कोई विस्तृत जिक्र नहीं किया गया था। फरार मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। मजदूरी के बहाने करते थे रेकी: ये शातिर अलग-अलग राज्यों में मजदूरी के बहाने जाते थे और सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम देते थे। घटना से पहले आरोपी हिमाचल प्रदेश के बंजार में मजदूरी कर रहे थे। वहां से मास्टरमाइंड भीम बहादुर के बुलावे पर वे विकासनगर पहुंचे और फर्जी आईडी के सहारे दो होटलों में ठहरे। यहां काम की तलाश का नाटक कर कई स्थानों की रेकी की और फिर ज्वेलरी शॉप को निशाना बनाया।फर्जी आईडी का खेल, वारदात के बाद तोड़ देते थे सिम: आरोपी निश्चल के पास से हिमाचल प्रदेश के पते पर बना एक फर्जी पहचान पत्र बरामद हुआ है। इसी फर्जी आईडी के आधार पर वह अपने साथियों के लिए सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। पुलिस को चकमा देने के लिए ये शातिर वारदात के दौरान इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड घटना के तुरंत बाद तोड़कर फेंक देते थे।
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