वज्रपात (आकाशीय बिजली) से होने वाली मौत पर सरकार अब मृतक के परिजनों को चार लाख मुआवजा देगी। सरकार ने वज्रपात को प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में डालकर मुआवजे की व्यवस्था की है।
इस संबंध में शासनादेश जारी हो गया है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट (एनडीएमए) के प्रावधानों के अनुसार वर्तमान में बाढ़, सुनामी, भूकंप, बादल फटना, भूस्खलन, सूखा, एवलांज, आग, ओलावृष्टि और कीट आक्रमण जैसी आपदाओं को ही प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में रखा गया है।
इन आपदाओं के चलते होने वाली मौतों और नुकसान के बाद पीड़ित परिजनों को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। उत्तराखंड जैसे देश के अन्य पर्वतीय राज्यों में इन आपदाओं के साथ साथ मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से तमाम मौतें हो जाती है।
मगर प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में नही होने की वजह से पीड़ित परिजनों को आर्थिक मदद नहीं मिल पाती। अब राज्य सरकार ने आकाशीय बिजली गिरने की घटना को न सिर्फ प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में रखा है।
आपदा सचिव अमित नेगी ने बताया कि इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। शासनादेश के मुताबिक आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों के बाद पीड़ित परिजनों को सरकार की ओर से चार लाख की आर्थिक मदद दी जाएगी। इस संबंध में सभी जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है।
गौचर से बद्रीनाथ तक लग रहे कदम-कदम के जाम से जतरवे (तीर्थयात्री) परेशान हो रहे हैं। कर्णप्रयाग लँगासु भकुंडा नंदप्रयाग चमोली पीपलकोटी पैनी मोड़ और जोशिमठ में लग रहा बार बार जाम। ये कस्बा क्षेत्र हैं। जहां संकरी सडक और तीखे मोड़ हैं। लिहाजा ऑल वेदर रोड़ के निर्माण को बीआरओ और प्रशासन कड़े फैसले ले।
तीन भेड़ पालकों की हुई थी मौत
एक दिन पहले उत्तरकाशी के मोरी ब्लाक के चांगसिल बुग्याल में आकाशीय बिजली गिरने से तीन भेड़ पालकों की मौत हो गई थी। जबकि सात लोग झु़लस गए थे। इसी घटना पर संज्ञान लेकर सरकार ने यह शासनादेश जारी किया है।