चारों धाम की व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता महसूस करते हुए वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी की व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि 1986 में वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के बनने के बाद वहां की यात्रा व्यवस्थाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
राज्य सरकार व शासन स्तर पर काफी विचार विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी की तर्ज पर यहां भी चारधाम श्राइन बोर्ड बनाया जाए। परंतु इसमें यहां की परंपराओं का पूरा ध्यान रखा जाए।
चारधाम क्षेत्र के अन्य मंदिरों पर भी किया जाएगा फोकस
अभी सारा फोकस बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री पर ही रहता है। चारों धाम के निकटवर्ती मंदिरों के लिए भी व्यवस्था नहीं थी। श्रद्धालु केवल इन्हीं के दर्शन कर लौट आते हैं। आसपास के दूसरे मंदिरों में बहुत कम यात्री जाते हैं। बोर्ड के अंतर्गत अन्य मंदिरों को लिए जाने से श्रद्धालुओं को वहां के पौराणिक महत्व के बारे में जानकारी मिलेगी। बोर्ड द्वारा इन मंदिरों के प्रबंधन और व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा।
निकटवर्ती स्थानों में बढेंगी पर्यटन गतिविधियां
बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के निकटवर्ती दूसरे मंदिरों की व्यवस्थाओं में सुधार और वहां के पौराणिक महत्व की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में यात्री वहां भी जाएंगे। इससे पर्यटन संबंधी गतिविधियां बढे़ंगी। इससे लोगों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय आर्थिकी विकसित होगी।
बोर्ड से मिलेगा रोजगार
देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के बनने के बाद चली आ रही सभी समितियां इसमें समाहित हो जाएंगी। समितियों के कर्मचारी पहले की भांति काम करते रहेंगे और वे बोर्ड के कर्मचारी माने जाएंगे। बोर्ड के काम का विस्तृत दायरा होने से नए पद सृजित किए जाएंगे। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
पौराणिक धरोहर का होगा समुचित संरक्षण
देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड आर्थिक व तकनीकी तौर पर अधिक सक्षम होगा। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ इसके अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों का ज्यादा अच्छे तरीके से रखरखाव होगा। पौराणिक महत्व के मंदिरों की धरोहर को संरक्षित किया जा सकेगा। इन धर्मस्थलों व मंदिरों का नियोजित विकास होगा। मंदिरों सहित निकटवर्ती क्षेत्रों के रखरखाव और विकास के लिए चारधाम निधि का गठन किया जाएगा।