कैसे काम करता है एयरोब्रिज
एयरोब्रिज द्वारा हवाई यात्री बिना ग्राउंड पर जाए टर्मिनल से सीधे विमान के अंदर जा सकेंगे और विमान से सीधे टर्मिनल तक आ सकेंगे। एक साथ चार एयरोब्रिज बनने के बाद एयरपोर्ट पर खड़े चार विमानों से यात्री सीधे टर्मिनल के बीच आवाजाही कर सकेंगे। इससे समय की भी बचत होगी और यात्रियों को धूप या बारिश की परेशानी भी नहीं होगी। एयरोब्रिज सिर्फ बोइंग या एयरबस (बड़े विमानों) तक आवाजाही सुनिश्चत करेगा। एटीआर (छोटे विमानों) के लिए एयरोब्रिज कार्य नहीं करेगा। ऐसे में इनके लिए पहले जैसी व्यवस्था रहेगी। देश के चुनिंदा एयरपोर्ट पर ही एयरोब्रिज की सुविधा है।
भूमि अधिग्रहण के बाद लगेगी कैट-वन एप्रोच लाइट
एयरपोर्ट पर कैट वन एप्रोच लाइट लगाने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसके लिए चोर पुलिया की तरफ से अठूरवाला और जौलीग्रांट की 1.9780 हेक्टयर जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस जमीन के 0.0800 हेक्टयर पर जौलीग्रांट के लोगों को रास्ता दिया जाएगा। शेष जमीन पर कैट वन एप्रोच लाइट लगाई जाएंगी। इन लाइटों के लगने के बाद कम दृश्यता और खराब मौसम में भी विमान आसानी से लैंड कर सकेंगे। फिलहाल इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस), पॉथ इंडिकेटर और दूसरे उपकरणों की मदद से प्लेन लैंड हो रहे हैं।
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टर्मिनल के साथ ही जौलीग्रांट एयरपोर्ट में चार एयरोब्रिज बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। जिसका लगभग 65 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। आगामी दिसंबर तक टर्मिनल और एयरोब्रिज के काम पूरा हो जाएगा। -प्रभाकर मिश्रा, एयरपोर्ट निदेशक देहरादून।