पेड़ नहीं कटने देंगे, जैसे नारों के बीच बुधवार को कुछ लोग गांधी पार्क में पेड़ों पर चिपके नजर आए। हाथों में चिपको आंदोलन की प्रणेता गौरा देवी की तस्वीरें लिए इन लोगों को देख लगा मानो खुद गौरा देवी ही दून की हरियाली बचाने आ गई हों।
चिपको आंदोलन के 40 साल पूरे
मौका था चिपको दिवस के 40 साल पूरे होने का। गौरा देवी को श्रद्धांजलि देने के साथ पर्यावरणविदों ने पूरे प्रदेश में चिपको जैसी मुहिम शुरू करने की जरूरत जताई।
मनाया चिपको दिवस
बुधवार को गांधी पार्क में मैती आंदोलन की ओर से मिशन ट्रू बायोलाजिस्ट के सहयोग से चिपको दिवस मनाया गया। चमोली के रैणी गांव निवासी महिला गौरा देवी के नेतृत्व में 26 मार्च 1974 को महिलाओं ने पेड़ों पर चिपककर जंगल कटने से बचा लिए थे।
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मैती के संस्थापक कल्याण सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में जितनी तेजी से पर्यावरणीय हानि हो रही है, उस लिहाज से चिपको आंदोलन चलता रहना चाहिए।
व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत
मिशन 'ट्रू बायोलॉजिस्ट' के संस्थापक डा. एमएस मेहता ने कहा कि पर्यावरणविदों के बीच व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है, ताकि लगातार कम हो रही वन भूमि को बचाया जा सके। विज्ञान शिक्षक व पर्यावरण प्रेमी पवन कुमार शर्मा ने कहा कि युवाओं के बीच गौरा देवी की जानकारी पहुंचाना जरूरी है, ताकि उनमें पर्यावरण और जंगलों के प्रति संवेदनशीलता कायम रहे।
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इस अवसर पर जीएमवीएन के पूर्व प्रबंधक चतर सिंह नेगी, चंद्रमोहन आनंद, योगेश मिश्रा, भृगुनाथ शर्मा, जागर गायिका बसंती बिष्ट, मंजू रावत, वीणापाणि जोशी, चकबंदी आंदोलन के कार्यकर्ता, रूपकुंड सांस्कृतिक समिति के कार्यकर्ता सहित भारी संख्या में पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।