शासन ने आखिरकार आपदा आने के चालीस दिन बाद पूरे राज्य को आपदाग्रस्त घोषित कर दिया। इसके लिए शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर दी गई।
हालांकि पूरे राज्य को आपदाग्रस्त घोषित किए जाने से केंद्र से मिलने वाली राशि के नियोजित खर्च पर आशंकाएं बढ़ गई हैं। इस संबंध में अमर उजाला ने गत 24 जुलाई को खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शासन की नींद टूटी।
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अमर उजाला ने इस बात पर शासन का ध्यान आकर्षित किया था कि दैवी आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों को आपदाग्रस्त घोषित करने की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। जिससे केंद्रीय मंत्रालयों से मिल रही विशेष मदद को खर्च को दिक्कत आएगी।
केंद्र के कई मंत्रालयों ने सहायता राशि देने के साथ स्पष्ट किया था कि इसे आपदाग्रस्त अधिसूचित क्षेत्रों में ही खर्च किया जाए, लेकिन जब इन क्षेत्रों को अधिसूचित ही नहीं किया गया तो वहां खर्च करने में मुश्किल आ रही थी। लिहाजा शासन ने खबर का संज्ञान लेते हुए पूरे राज्य को ही आपदाग्रस्त घोषित कर दिया।
सरकार के सामने बढ़ेंगी दिक्कतें
सरकार ने पूरे राज्य को आपदाग्रस्त घोषित तो कर दिया, लेकिन इसमें व्यवहारिकता के पैमाने को ही उलट दिया। आपदाग्रस्त क्षेत्र वही घोषित होना चाहिए था जहां आपदा आई। असलियत देखी जाए तो रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर के अलावा कोई भी जिला पूरी तरह से आपदा की चपेट में नहीं है। इन जिलों के बाद सर्वाधिक असर हरिद्वार में हैं। जहां पर खानपुर, लक्सर व हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में जबरदस्त नुकसान हुआ है।
टिहरी के केवल घनसाली क्षेत्र में ही नुकसान है। पौड़ी, चंपावत में कहीं कहीं, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल, अल्मोड़ा में भी ऐसा कहर नहीं बरपा जिसे आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जा सके। अब सभी विधायकों को अपने क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज से मिली धनराशि चाहिए होगी। ऐसे में सरकार के सामने परेशानी भी बढ़ेगी। यह भी हो सकता है कि असल नुकसान वाले क्षेत्रों की उपेक्षा ही हो जाए।
इसलिए जरूरी थी अधिसूचना
- क्षेत्र अधिसूचित किए बगैर मंत्रालयों से मिलने वाली राशि को खर्च नहीं किया जा सकता
- आपदाग्रस्त घोषित करने के बाद अब राज्य में खर्च होगी केंद्र से मिली अतिरिक्त आर्थिक मदद
- विशेष मदद के तौर पर यह धनराशि एनसीआरएफ से मिलने वाली मदद से अलग होती है
- आपदा घोषित करने के बाद ही किसानों या प्रभावितों के बैंक ऋण माफ किए जाते हैं
क्यों पूरा राज्य शामिल
- हर जिले में आंशिक या पूर्ण रूप से बारिश या नदियों से हुआ नुकसान
- पूरे राज्य को आपदाग्रस्त घोषित करने के पीछे राजनीतिक दबाव भी था
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