मोदी सरकार की दूसरी पारी में आपको मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने की कोई खास वजह रही?
प्रधानमंत्री जी के दिमाग में बहुत सारे फैक्टर होते हैं, जिनके हिसाब से वे अपनी टीम का चयन करते हैं। इतना बड़ा देश है तो उसमें हर तरह का प्रतिनिधित्व रखना होता है। सबको अपनी अपनी जिम्मेदारी मिलती है। या तो आज मिलेगी या कल मिलेगी। लेकिन जिम्मेदारी सबको मिलेगी।
इस बार मोदी मंत्रिमंडल में न रहना आपको अखरा?
प्लान और आइडिया तो आज भी हम प्रधानमंत्री जी को देते हैं। प्रधानमंत्री जी का दफ्तर हमेशा उनके लिए खुला रहता है जो आइडिया देना चाहते हैं। यह अलग बात है कि जब लोग किसी को अच्छा काम करते देखते हैं तो चाहने वाले अपने हिसाब से आप को बढ़ता देखना चाहते हैं। यह हर परिवार और संस्थान में होता है। प्रधानमंत्री जी ने सबसे पहले मुझे सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया तो उसके पीछे भी उनकी सोच थी। हमारी पार्टी लोगों के व्यक्तित्व निखार कर 15-20 साल के बाद के राजनीतिक भविष्य को तैयार कर रही है। इसीलिए अलग-अलग जिम्मेदारी दी जाती है।
अपने राजनीतिक करियर को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं?
मुझे देश के लिए समाज के लिए काम करना है। यह निर्णय हमारे कैप्टन को करना है कि किस फील्डर को कहां लगाएं। अगर चार पांच फील्डर ऐसे आ जाएं कि हमें कवर पर ही रहना है तो वो टीम कैसे चलेगी। ऐसे में कप्तान को तय करना होता है, वो जहां तैनात करेंगे वहीं जिम्मेदारी से काम करना है।
तो आप भाजपा के भविष्य की लीडरशिप तैयार करने के प्लान का हिस्सा हैं?
छोटा सा हिस्सा हूं। बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें पार्टी भविष्य के लिए तैयार कर रही है। एक समय आडवानी जी ने ग्रूमिंग की। आज प्रधानमंत्री जी और अमित शाह जी एक प्लान के तहत काम कर रहे हैं।
चर्चा है कि आप राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के विकल्प के तौर पर तैयार किए जा रहे हैं। आप क्या मानते हैं?
आपके काम करने का तरीका और क्षमता को देख कर पार्टी आपका आकलन करती है। बहुत पहले से आपको बताया नहीं जाता कि आपको क्या जिम्मेदारी दी जानी है। पहले आप अपनी सीख के लिए परिश्रम करते हैं फिर पार्टी अपने हिसाब से आपको जिम्मेदारी देती है। मैंने अपने आप को हमेशा संतुष्ट पाया। जब मैं सेना में था तो संतुष्ट था। जो मेरी चार पीढ़ियां कर रही थी, मैं भी वही कर रहा हूं। उसके बाद खेलने का मौका मिला तो उससे लगा कि यह तो बोनस है जीवन में। पहले आपने सेना में शानदार काम किया और अब खेलों में राष्ट्र का नेतृत्व कर रहा हूं। शूटिंग में पहला ओलंपिक सिल्वर मिला, जो उस समय तक किसी ने नहीं जीता था। तब ऐसा एहसास हुआ कि मेडल जीतने के लिए खिलाड़ियों को जैसा वातावरण की जरूरत है वो नहीं मिल रहा, तो नीति निर्धारण में आ गया। बिना किसी राजनीतिक बैकग्राउंड आपको टिकट मिल जाए, मंत्री पद मिल जाए, तो इससे बड़ा बोनस क्या हो सकता है। इतने बोनस मिलने के बाद आप बोंलेंगे साहब मेरे साथ यह ठीक नहीं हुआ। अब मैं मानता हूं कि राजनीतिक जीवन का एक पड़ाव है। यह पड़ाव आपको बहुत कुछ सीखाता है। मैं शुक्रगुजार हूं प्रधानमंत्री जी का यह पड़ाव तो उन्होंने मुझे दिया।
आपके राजनीतिक जीवन में आए इस ‘पड़ाव’ का कैसे सदुपयोग कर रहे हैं?
इस पड़ाव के दौरान मुझे अपने लोकसभा क्षेत्र में अधिक समय देने का। पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का मौका मिला। मुझे अब समय मिल रहा है। युवाओं से बातचीत का मौका मिल रहा है। लंबे अरसे बाद एक बार फिर भारतीय सैन्य अकादमी में आ पाया। आइडिया मिल रहे हैं। अपने क्षेत्र में डेढ़ सौ किलोमीटर दूर उपचुनाव चल रहे हैं उसमें सक्रियता से जिम्मेदारी निभा रहा हूं।