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दून लिस्ट फेस्ट: राजनीति में आने पर पता चली हिंदी की असली ताकत- राज्यवर्धन सिंह राठौर 

Sat, 12 Oct 2019 09:09 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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राज्यवर्धन सिंह राठौर - फोटो : अमर उजाला
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पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्नल (सेनि) राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि हिंदी की असली ताकत का एहसास उन्हें राजनीति में उतरने के बाद हुआ। उन्होंने कहा कि हिंदी इस देश की आत्मा है। आम आदमी हिंदी को बेहतर समझता, पढ़ता-लिखता और बोलता है। वह दून लिटफेस्ट में चर्चा कर रहे थे। अमर उजाला इसका मीडिया पार्टनर है।

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देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन यूथ एंड एक्सपेक्टेशन सत्र में कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि खिलाड़ी के तौर पर आपको हर बार शून्य से शुरुआत करनी पड़ती है। हर मुकाबले में आप जब उतरते हैं तो आपके पिछले प्रदर्शन कोई मायने नहीं रखते। राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि जीवन में मेहनत और ज्ञान का कोई विकल्प नहीं है।

परिस्थितियां बदलती रहती हैं, आपको सही समय को पहचानते हुए पूरी मेहनत से कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हमारी मेहनत और ज्ञान का स्तर ठीक होगा तो स्थितियां अनुकूल होते ही हम आगे बढ़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए मैदान में जीतने से पहले अपने दिमाग में जीतना जरूरी है। जब वह डर और मुश्किलों को दिमाग से निकाल कर मैदान में उतरता है तो उसके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
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सरकारी विभागों में नहीं सामंजस्य

कर्नल राठौड़ ने कहा कि सरकारी विभागों में समन्वय न होने के कारण कई बार लोगों को योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। खेलो इंडिया का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा और खेल विभाग को मिलकर इस योजना को चलाना था। लेकिन पहले साल दोनों विभागों के बीच आपस में कोई समन्वय ना होने से इसके क्रियान्वयन में बहुत ज्यादा दिक्कतें आईं। हालांकि बाद में जब दोनों विभागों ने आपस में बातचीत की तो स्थिति में काफी सुधार हुआ। 

निशानेबाजी में जीतेंगे ओलपिंक पदक

उन्होंने कहा कि निशानेबाजी ऐसा खेल है, जिसमें उम्र की कोई सीमा नहीं है। ओलंपिक में 15 साल की लड़की भी निशानेबाजी में पदक जीत जाती है। पुरुषों के साथ ही इसमें महिलाओं के लिए भी बहुत मौके हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय निशानेबाज ओलंपिक में पदक जीतने की काबिलियत रखते हैं।

खाली समय में पढ़ता हूं किताबें

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि उन्हें पढ़ने का काफ ी शौक है। खाली समय में वह जासूसी और एक्शन की किताबें पढ़ना पसंद करते हैं। इसके अलावा यथार्थ से जुड़ी फिल्में भी उन्हें पसंद है। उन्होंने कहा कि रियल लाइफ  पर आधारित किताबें उन्हें अपनी ओर खींचती है।

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कर्नल राठौर ने कैडेटों से साझा किये सैन्य व खेल जीवन के अनुभव

सेवानिवृत्त कर्नल व सांसद राज्यवर्धन राठौर ने आइएमए का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जेंटलमैन कैडेट को संबोधित किया और उनके साथ अपने खेल और सैन्य जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए। इस दौरान उन्होंने कै डेटों को बेहतर सैन्य अफसर बनने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान कर्नल राठौर आइएमए कमांडेंट ले.जनरल एसके झा सहित अन्य सैन्य अधिकारियों से भी मिले। कमांडेंट ने उन्हें आइएमए का प्रतीक चिह्न भी भेंट किया।  

कर्नल राज्यवर्धन राठौर आइएमए से ही पासआउट हुए थे। वह आइएमए से 77 वें कोर्स के स्नातक है। इस दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर जेंटलमैन कैडेट के लिए स्वार्ड ऑफ ऑनर का खिताब दिया गया था। उन्हें पाठ्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए भी सम्मानित किया गया था। सिख रेजीमेंअ गोल्डमेडल प्राप्तकर्ता भी वह रहे हैं। अतिविशिष्ठ सेवा मेडल, कर्नल राठौर ने 2004 एथेंस ओलंपिक खेलों में राइफल डबल ट्रैक रजत ओलंपिक में भारत का पहला व्यक्तिगत रजत पदक जीतकर इतिहास रचा था।

सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त के बाद वह भाजपा में शामिल हो गए और वर्तमान में सांसद सदस्य है। वर्तमान में वह दून लिटलेचर फेस्टिवल में भाग लेने दून आए थे। इसी दौरान उन्होंने शुक्रवार को आईएमएम का दौरा किया और वहां उनका जेंटलमैन कैडेट को प्रेरित करने के लिए एक गेस्ट लेक्चर रखा गया था। लेक्चर के दौरान उन्होंने अपने सैन्य व खेल जीवन के अनुभवों को जेंटलमैन कैडेटों के साथ साझा किया। साथ ही उन्होंने कै डेटां को भविष्य में बेहतर सैन्य नेता बनने के लिए प्रेरित किया। आइएमए के कमांडेंट मेजर जनरल एसके झा ने कहा कि सेना और खेल में उनका अनुभव निश्चित रूप से जैंटलमैन कैडेटों को शिखर तक पहुंचने में मदद करेगा।
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