पूर्व प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से बांध की तकनीक और विद्युत उत्पादन सहित स्पिल-वे, जलाशय और कोटेश्वर बांध परियोजना के बारे में पूछा। इसके बाद उन्होंने पावर हाउस का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में टिहरी प्राजेक्ट से एक हजार मेगावॉट और कोटेश्वर बांध से 400 मेगावॉट विद्युत उत्पादन हो रहा है जबकि पीएसपी (पंप स्टोरेज प्लांट) निर्माणाधीन है। इसकी क्षमता भी एक हजार मेगावॉट की है। 2021 तक यह प्रोजेक्ट भी पूरा हो जाएगा जिसके बाद बांध से 2400 मेगावॉट विद्युत उत्पादन होगा।
बांध से विद्युत उत्पादन के अलावा सिंचाई और पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था भी उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब राज्यों में की जा रही है। इलाहबाद में संपन्न हुए महाकुंभ में पर्याप्त पानी के लिए टिहरी बांध की भूमिका अहम रही। बताया कि 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुंभ के लिए भी बांध महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जानकारी के बाद उन्होंने अधिकारियों को इसके लिए शाबाशी भी दी।
डैम भ्रमण के उपरांत पूर्व प्रधानमंत्री नई टिहरी से 3 बजे जौलीग्रांट हवाई अड्डे के लिए रवाना हो गए। इस मौके पर एडीएम शिवचरण द्विवेदी, टीएचडीसी के जीएम (ओएंडएम) सजीव आर, एजीएम वीर सिंह, सुरेश वर्मा आदि मौजूद रहे।