संजीव की जांच रिपोर्ट में भी कई हैरान करने वाले खुलासे हुए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक रिजर्व, सिविल और पंचायत वनों के साथ ही नाप भूमि के सूखे पेड़ों और खूंटाें से छिलके और गुलिया निकाली जा सकती है। जांच में सामने आया था कि गुप्ता ने अनुमति ग्राम सभा के कुछ पेड़ों को काटने की दी लेकिन पास ही के रिजर्व वन से कई पेड़ों को काटा गया। यही खेल अन्य स्थानों पर भी किया गया।
छिलका गुलिया ले जाने वाले ट्रक में 50 क्विंटल का भार दिखाया गया लेकिन इसमें करीब 80 क्विंटल भार था। हैरानी की बात यह थी कि यह ट्रक तीन वन चौकियों से पास हुआ और इसके बाद इसे पुलिस ने जब्त किया तो मामला खुला।
लीसा में घपलेबाजी का मामला एक ऑडियो से सामने आया था। इसमें एक अधिकारी 80 हजार लीसा टिन के लिए प्रति टिन तीन रुपये का कमीशन मांगते हुए सुनाई दिए। संजीव चतुर्वेदी की रिपोर्ट में कहा गया कि ये अधिकारी कोई और नहीं अशोक कुमार गुप्ता ही थे। इसके बाद शासन ने गुप्ता को प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय से अटैच कर दिया था। संजीव की जांच रिपोर्ट में कई और अनियमितताओं के मामले भी सामने आए थे।