जलागम की आईडब्ल्यूएमपी योजना के तहत कृषि विभाग की ओर से कराए गए कार्यों में फर्जीवाड़ा सामने आया है। गांवों में तालाब, तार जाल, टैंक निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के लिए बने मस्टरोल में हेल्थ वर्कर और टीचर सहित सरकारी, अर्द्ध सरकारी, संविदा कर्मचारी और प्राईवेट नौकरी करने वाले 39 लोगों के फर्जी हस्ताक्षर और नामों से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
जलागम की आईडब्ल्यूएमपी योजना के तहत चकराता और त्यूनी के खुनोरी, वोडियूधार, चिलाखेड़ा, सारीखेड़ा, पाटीधार, डाकुरखेड़ा, डोडाखेड़ा सहित तमाम गांवों में तार जाल भरान, टैंक, चरई व फूलदार पेड़, कच्चे तालाब आदि कार्य होने थे। कृषि विभाग को इसके लिए कार्यदायी संस्था बनाया गया। पहले तो मुख्य कृषि अधिकारी की सहमति के बगैर 50 लाख रुपये से अधिक की धनराशि के कार्य करा दिए गए, अब इनमें फर्जीवाड़ा भी समाने आया है।
उप जिलाधिकारी चकराता प्रेम लाल की रिपोर्ट के मुताबिक जिन 39 लोगों के नाम मस्टरोल में दर्शाए गए हैं। वे सरकारी और संविदा कर्मचारी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लाखीराम, मातवर सिंह व जगत सिंह शिक्षक हैं एवं अजब सिंह शिक्षा मित्र हैं। इसके अलावा अन्य कर्मचारियों में राजेंद्र सिंह स्वास्थ्य विभाग में डाटा एंट्री ऑपरेटर हैं। मस्टरोल में लोगों के फर्जी नाम व हस्ताक्षर कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
कृषि विभाग इसमें कार्यदायी संस्था है, मेरे पास जो जांच रिपोर्ट आई थी उसे संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए भेजा जा चुका है।
- आंनद वर्द्धन, सचिव जलागम