जंगल में गश्त के दौरान शिकारियों से सामना होने और हाथी बाहुल्य क्षेत्र में लोगों के जानमाल की सुरक्षा करने वाले वनकर्मी स्वयं असुरक्षित हैं। दरअसल, संकट के समय हवाई फायर के लिए कारतूस नहीं है । मजे की बात यह कि रेंज कार्यालय ने मुख्यालय से गोली की डिमांड की, लेकिन वहां से पटाखे भिजवा दिए गए।
ऋषिकेश वन रेंज की सीमा दून मार्ग से छिद्दरवाला हाईवे तक है। काफी बड़ा क्षेत्रफल होने के कारण वनकर्मियों को वन्य जीवों, हरे पेड़ और आबादी में घुसे हाथी को खदेड़ने के लिए बंदूक आदि सुरक्षा उपकरण से लैस होना जरूरी है। वनकर्मियों के पास बंदूक तो है, लेकिन महज शोपीस है। संकट के समय फायर के लिए बंदूक में गोली नहीं है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो चार महीने से गोली का कोटा खत्म हो चुका है। 315 और 12 बोर के कारतूस की डिमांड वन प्रभागीय कार्यालय दून को भेजी जा चुकी है, लेकिन मुख्यालय ने गोली की जगह पटाखे की खेप भिजवाकर इतिश्री कर ली।