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...तो अब आबादी में नहीं आएंगे गजराज, नए गलियारों की तलाश करेगा वन विभाग

Thu, 16 May 2019 08:21 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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बढ़ती आबादी और विकास का प्रभाव वन्यजीवों पर भी पड़ा है। प्राकृतिक गलियारे समाप्त होने से हाथी आबादी का रुख करने लगे। जिसका खामियाजा न केवल इंसानों को उठाना पड़ा, बल्कि हाथियों को भी अपनी जान गवानी पड़ी। ऐसे में जानवरों के संरक्षण और जनहित को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने हाथियों के नए गलियारों को तलाशने की कवायद शुरू कर दी गई है।

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रहने की व्यवस्था करने के लिए लोगों ने प्राकृतिक जंगलों को काटकर कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए हैं। इसका प्रभाव हाथी के प्राकृतिक आवास पर पड़ा और कई स्थानों पर हाथी के गलियारों में बाधा उत्पन्न हुई, तो कईं जगह गलियारे ही समाप्त हो गए। इस कारण हाथियों को विचरण के लिए मार्ग बदलना पड़ा।

मार्ग बदलने से वें आबादी वाले इलाकों का रुख करने लगे। इससे वन्यजीव और मानव के बीच में संघर्ष बढ़ा। भेल में ही तीन लोगों को हाथी ने मौत के घाट उतार दिया। मार्च में राजाजी टाइगर रिजर्व की धौलखंड रेंज में लकड़ी बीनने गई एक महिला को हाथी ने पटककर मार डाला था, जबकि दूसरी महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। 

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आबादी में आने से 25 से अधिक हाथी ट्रेन की चपेट आकर अपनी जान गवां चुके हैं। दो सप्ताह पूर्व एक गज शिशु सड़क दुघर्टना में मारा गया था। इन तमाम दुर्घटनाओं को देखते हुए वन विभाग के सामने हाथियों का संरक्षण करना बड़ी चुनौती बन गया है।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने हाथियों के नए गलियारों को चिह्नित करने की योजना बनाई है। ताकि गजराज स्वच्छंदता पूर्वक विचरण कर सकें। हालांकि नए गलियारे वे होंगे जहां हाथी सक्रिय रूप से लगातार विचरण कर रहे हैं। वार्डन कोमल सिंह ने बताया कि हाथी के नए गलियारों की तलाश की जा रही है। 

वर्तमान गलियारे
- दक्षिण पतली दून-चिलकिया
- रवासन-सोनानदी (बिजनौर)
- रवासन-सोनानदी (लैंसडौन)
- मोतीचूर-गौहरी
- चीला-मोतीचूर
- कासरो-बड़कोट
- चिलकिया-कोटा
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