आबादी में आने से 25 से अधिक हाथी ट्रेन की चपेट आकर अपनी जान गवां चुके हैं। दो सप्ताह पूर्व एक गज शिशु सड़क दुघर्टना में मारा गया था। इन तमाम दुर्घटनाओं को देखते हुए वन विभाग के सामने हाथियों का संरक्षण करना बड़ी चुनौती बन गया है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने हाथियों के नए गलियारों को चिह्नित करने की योजना बनाई है। ताकि गजराज स्वच्छंदता पूर्वक विचरण कर सकें। हालांकि नए गलियारे वे होंगे जहां हाथी सक्रिय रूप से लगातार विचरण कर रहे हैं। वार्डन कोमल सिंह ने बताया कि हाथी के नए गलियारों की तलाश की जा रही है।
वर्तमान गलियारे
- दक्षिण पतली दून-चिलकिया
- रवासन-सोनानदी (बिजनौर)
- रवासन-सोनानदी (लैंसडौन)
- मोतीचूर-गौहरी
- चीला-मोतीचूर
- कासरो-बड़कोट
- चिलकिया-कोटा