वन विभाग की टीम ने गुलदार की चार खाल और भालू के पित्त की तीन थैली के साथ दो लोगों को हिरासत में लिया है। दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। कोर्ट में पेश करने के बाद आरोपियों को जेल भेज दिया जाएगा।
रविवार को रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ राजीव धीमान व एसडीओ एमएस सिरोही के नेतृत्व में गठित टीम मुखबिर की सूचना पर कालीमठ क्षेत्र पहुंची। जहां बेडूला गांव के समीप चंद्रू लाल पुत्र मुल्या लाल और बीरेंद्र लाल पुत्र थेपरू लाल निवासी राउंलेक (ऊखीमठ) को हाथ में प्लास्टिक का एक-एक बोरा होने के कारण संदेह के आधार पर रोका गया।
वन विभाग की टीम द्वारा मौके पर ही दोनों से पूछताछ करते हुए तलाशी ली गई तो चंदू लाल के पास गुलदार की दो खालें और भालू की तीन पित्त की थैली बरादम हुई। जबकि बीरेंद्र लाल के पास गुलदार की दो खालें मिली। दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर टीम प्रभागीय कार्यालय रुद्रप्रयाग ले आई है। पूछताछ में आरोपियों ने खालें व पित्त की थैलियों को राउलेंक के जंगल से लाने की बात कही है।
डीएफओ धीमान ने बताया कि दो-तीन दिन सूचना मिली थी कि सेंचुरी क्षेत्र में वन्य जीवों का अवैध शिकार कर अंगों की तस्करी में गिरोह सक्रिय है। सभी साक्ष्यों को जुटाने के बाद यह धरपकड़ की गई है, जिसमें दो लोग पकड़े गए हैं। अधिकारियों ने संभावना जताई कि क्षेत्र में अब भी कुछ और लोग मौजूद हैं, जो अवैध तस्करी कर रहे हैं। हो सकता है कि उनके निशाने पर अन्य वन्य जीव भी हो।