मुनिकीरेती क्षेत्र में शिवपुरी रेंज की वनक्षेत्राधिकारी, ढालवाला चौकी प्रभारी और कैलासगेट चौकी में तैनात दो पुलिसकर्मियों के डेंगू से पीड़ित हैं। नगर क्षेत्र के प्राइवेट अस्पतालों में उनका उपचार चल रहा है। जुलाई से अभी तक 32 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन इसे रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कोई कार्ययोजना नहीं है।
ऋषिकेश नगर निगम और मुनिकीरेती नगरपालिका की कार्यप्रणाली भी सवालों में है। हालांकि, दोनों ही निकायों के अधिकारी क्षेत्र में नियमित फॉगिंग और कीटनाशक दवाओं के छिड़काव का दावा कर रहे हैं।
शहर में एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में डेंगू मरीजों की जांच के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। डेंगू रोग की पुष्टि के लिए मरीज के नमूनों को देहरादून में भेजा जाता है, जिसकी रिपोर्ट आने में ही कई दिन लग जाते हैं, लिहाजा मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों को रुख करना पड़ रहा है। अभी तक 12 मरीज प्राइवेट अस्पतालों से ही सामने आ चुके हैं। यही नहीं, सरकारी अस्पताल में पर्याप्त फिजिशियन नहीं हैं।
नगर क्षेत्र में 55 आशाओं की टीम को लगाया गया है। वह लोगों के घर-घर जाकर उन्हें जागरूक कर रही हैं। खासकर प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। नगर निगम के माध्यम से लगातार फॉगिंग भी कराई जा रही है। विभाग डेंगू को खत्म करने के लिए भरसक प्रयास करने में जुटा है।
- डॉ. सुभाष जोशी, जिला मलेरिया अधिकारी, देहरादून
क्षेत्र में कीटनाशक दवाओं को छिड़काव कराया जा रहा है। नगरपालिका भी फॉगिंग कर रही है, लेकिन फिर भी डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं, तो फिर से लोगों को जागरूक कर कीटनाशक दवा क्षेत्र में छिड़की जाएगी।
- डॉ. कृष्णा पांगती, जिला मलेरिया अधिकारी, टिहरी