13 साल बाद बढ़ेगा शुक्ल
प्रदेश के लिए ईको टूरिज्म कम दाम में अधिक मुनाफे वाला जैसा सौदा है लेकिन पिछले 13 सालों से शुल्क निर्धारण में कोई संशोधन ही नहीं किया गया। वर्ष 2009 में आखिरी बार संबंधित गतिविधियों का शुल्क निर्धारित किया गया था। इधर, मुख्य वन संरक्षक ईको टूरिज्म डॉ. पराग मधुर धकाते ने बताया कि ईको टूरिज्म के तहत लिए जाने वाले शुक्ल का निर्धारण कर लिया गया है। फाइल शासन को भेज दी है। संभवत: अगले माह तक नई दरें लागू कर दी जाएंगी।
प्रदेश में चिह्नित ईको टूरिज्म क्षेत्र
धनोल्टी ईको पार्क (टिहरी), सिमतोला ईको पार्क (अल्मोड़ा), कौड़िया ईको पार्क (टिहरी), लच्छीवाला नेचर पार्क (देहरादून), नीर झरना (ऋषिकेश), हिमालय बॉटेनिकल गार्डन (नैनीताल), संजय वन (हल्द्वानी), चौरासी कुटिया (राजाजी टाइगर रिजर्व), जीबी पंत हाई एल्टीट्यूड जू (नैनीताल), देहरादून जू-हर्बल गार्डन, ईको पार्क (मुनस्यारी), कॉर्बेट न्यूजिम (कालाढूंगी), कॉर्बेट फॉल (रामनगर), बराती राव (रामनगर)।
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प्रदेश में कई सालों से ईको टूरिज्म के तहत निर्धारित शुक्ल में संशोधन नहीं हुआ है। अब इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। इसमें कुछ गतिविधियों के दाम बढ़ाए जाने तो कुछ के कम किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। शुक्ल निर्धारण पर अंतिम फैसला शासन को लेना है।
- विनोद कुमार सिंघल, वन प्रमुख, पीसीसीएफ (हॉफ)