नंदा देवी बायो स्फीयर की पहाड़ियों के शिखर तक पहुंची थी आग
सर्दियों में जंगल की आग काफी भीषण थी, यह आग नंदा देवी बायोस्फीयर की पहाड़ियों के शिखर तक पहुंच गई थी। यह आग कई दिनों तक लगी रही थी।
मानसून के बाद शांति
मानसून आने के साथ ही जंगल की आग नियंत्रित हो जाती है। इसके बाद वन विभाग प्लांटेशन के काम में व्यस्त हो जाता है। मानसून में लंबी गश्त भी शुरू होती है। ऐसे में जंगल की आग की आग को लेकर महीनों तक पूरी तरह फोकस नहीं रह जाता है।
दो दिनाें में 54 घटनाएं
देहरादून। प्रदेश में जंगल की आग की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 25 मई तक प्रदेश में 394 जंगल की आग की घटना रिपोर्ट हुई थी, जिनकी संख्या बढ़कर 448 पर पहुंच गई। इसमें गढ़वाल रीजन में 329, कुमाऊं में 83 और वन्यजीव क्षेत्र में 36 घटनाएं हुई है। इन घटनाओं में 370 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंच चुका है। इन घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई है। पूर्व मुख्य वन संरक्षक एसके सिंह बताते हैं कि सर्दियों में लगने वाली आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए योजना बनानी होगी। इसके साथ ही आग के मूल कारणों को जानने के साथ ही उसके समाधान का प्रयास करना होगा।
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केंद्र से वनाग्नि नियंत्रण के लिए जल्द आर्थिक मदद देने का करेंगे अनुरोध
प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा बताते हैं कि वनाग्नि की घटनाओं के मद्देनजर पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से तत्काल आर्थिक मदद के लिए पत्र भेजा जाएगा। इसके अलावा कैंपा मद से भी राशि जारी करने का अनुरोध किया जाएगा। राशि मिलने के साथ ही जो पांच साल की कार्ययोजना बनी है, उसके आधार पर आगे कार्य होगा। मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक बताते हैं कि सर्दियों की आग को लेकर भी प्लान बनाकर कार्य होगा। जंगल की आग के नियंत्रण के लिए प्रयास किए गए हैं। इसमें अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जाता है।