वनाग्नि की घटनाएं
नवंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक 61 वनाग्नि की घटनाएं हुईं। इस दौरान नंदा देवी बायोस्फीयर के जंगलों में आग लगी थी। आग पहाड़ियों की चोटियों तक पहुंच गई थी, जिसे बड़ी मुश्किल से काबू किया गया। 15 फरवरी से 21 अप्रैल 2026 तक 144 जंगल की आग की घटनाओं में 85 हेक्टेयर जैव विविधता को नुकसान हुआ है।
औसत से अधिक बारिश और आपदाएं
राज्य में बारिश की प्रवृत्ति भी बदल रही है। जुलाई 2025 में औसत से कम बारिश 350.2 एमएम हुई, जो कि औसत बारिश 417.8 एमएम की तुलना में कम थी। जबकि 2022, 2023 और 2024 में यह अधिक रही। अगस्त 2024 और 2025 में भी औसत से अधिक बरसात दर्ज की गई। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत के अनुसार, कम समय में तेज बारिश से समस्या बढ़ी है। पिछले साल हर्षिल, धराली समेत कई स्थानों पर बड़ी आपदाएं आई थीं। साथ ही छेनागाड, ताल जामण, तमकनाला, थराली, चेपड़ों, मोपाटा, पौसारी, बैसानी, थाने, भुजियाघाट, गुदमी, स्यानाचट्टी समेत अन्य जगहों पर आपदा से नुकसान पहुंचा था।