इस तरह एफएसआई की होती रिपोर्ट तैयार
एफएसआई के वैज्ञानिकों के अनुसार वन अग्नि से संबंधित रिपोर्ट को सेटेलाइट डेटा के आधार पर तैयार किया जाता है। इसमें पहले फायर अलर्ट जहां पर होता है उसे देखा जाता है। फिर उसे जगह पर स्पॉट या जले हुए स्थान को देखा जाता है। संबंधित जगह पर दो महीने पूर्व क्या स्थिति थी उसका भी तुलनात्मक तौर पर अध्ययन किया जाता है। अगर वहां पर पहले वेजिटेशन था और अब स्पॉट दिखाई दे रहा है तो यह जला हुआ हिस्सा माना जाता है। कुछ जगहों पर भू सत्यापन भी किया जाता है। इन सब के आधार पर रिपोर्ट को तैयार किया जाता है।
बड़े पैमाने पर कंट्रोल बर्निंग की जाती
जंगल को आग से बचाने के लिए तमाम प्रयास के दावे किए जाते हैं। इसमें एक कंट्रोल बर्निंग भी है। इसके तहत वर्ष-2024 में राज्य के 25 वन प्रभागों में कंट्रोल बर्निंग (नियंत्रित फुकान) का काम किया गया। इसके तहत वन विभाग ने 201253.94 हेक्टेयर में नियंत्रित फुकान किया था। इसके बाद भी 1276 घटनाएं हुईं, इनमें 1771 हेक्टेयर जंगल का क्षेत्र प्रभावित हुआ।
बीते 10 वर्षों में वनाग्नि की घटनाएं
| वर्ष |
घटना- |
प्रभावित क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) |
| 2015 |
412 |
701.66 |
| 2016 |
2074 |
4433.75 |
| 2017 |
805 |
1244.64 |
| 2018 |
2150 |
1822.90 |
| 2019 |
2158 |
779.2 |
| 2020 |
0135 |
104.36 |
| 2021 |
2813 |
3943.89 |
| 2022 |
2186 |
3425.05 |
| 2023 |
773 |
933.37 |
| 2024 |
1276 |
1771.665 |
| 2025 |
268 |
310.95 |
परीक्षण कराया जाएगा
वन मंत्री सुबोध उनियाल कहते हैं कि यह विषय उनके संज्ञान में नहीं है, इसका परीक्षण कराया जाएगा। प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) समीर सिन्हा का कहना है कि जो वनाग्नि का आकलन किया जाता है, वह एफएसआई के डेटा के अनुसार किया जाता हे। इसके अलावा सीधे भी सेटेलाइट का डेटा मिलता है, उनसे भी आकलन होता है। जो एफएसआई और वन विभाग के डेटा में विरोधाभास है, उसका परीक्षण करा लिया जाएगा।