बाघों की बढ़ती संख्या के बीच एक चिंताजनक संकेत भी है। जहां पर बाघों की संख्या तो बढ़ी पर वन और वृक्ष आवरण घट गया। फाॅरेस्ट सर्वे आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार कार्बेट, राजाजी टाइगर रिजर्व के अलावा नेशनल पार्क में वन आवरण घट गया है। जबकि यह संरक्षित इलाके हैं।
कार्बेट टाइगर रिजर्व से सटे प्रभागों के भी हाल खराब
वन प्रभागों के हाल भी खराब हैं। इसमें कार्बेट टाइगर रिजर्व से सटे वन प्रभाग शामिल हैं। इसमें तराई पश्चिम 372 और रामनगर वन प्रभाग में 122 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वृक्ष व वन आवरण घटा है। बदरीनाथ वन प्रभाग में 405, बागेश्वर 237, चंपावत 193, देहरादून 225 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन और वृक्ष आवरण घटा है। इसी तरह गढ़वाल वन प्रभाग में 230, हल्द्वानी 54, हरिद्वार 146, मसूरी 63, नैनीताल 182, रामनगर 122, रुद्रप्रयाग 169, तराई केंद्रीय 755 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वृक्ष और वन आवरण घट गया है।
यहां पर हुआ सुधार
कुछ जगह स्थिति ठीक रही है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के बफर जोन में 37 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हुई है। अल्मोड़ा वन प्रभाग में 542, चकराता 443, सिविल सोयम कालसी और अल्मोड़ा मं क्रमश: 219 और 48, लैंसडाउन 288, पिथौरागढ़ 69, तराई पूर्वी 18 और टिहरी वन प्रभाग में 939 की बढ़ोतरी हुई है। जबकि बिनसर और बिनोग अभयारण्य, गंगोत्री नेशनल पार्क में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व में सबसे बड़ी आग रिपोर्ट हुई
फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया ने देश के जितने भी टाइगर रिजर्व हैं। जहां पर सर्वाधिक बाघ रहते हैं। यहां पर 12 बड़ी जंगल की आग को रिपोर्ट किया गया। इसमें चार से पांच दिन तक चलने वाली आग के दो मामले रिपोर्ट हुए हैं।