भारतीयों से योग सीखकर पारंगत हुए विदेशी योग गुरु अब भारत में साधकों को योग क्रिया सीखा रहे हैं। अमेरिका के बुध दंपत्ति ने श्री विश्वनाथ संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों को भावातीत योग के गुर सिखाए। उन्होंने छात्रों को योग के फायदे बताते हुए योगाभ्यास पर जोर दिया।
भारत के ऋषि मुनियों द्वारा तैयार योग विद्या विदेशों तक पहचान बना चुकी है। विदेशी साधकों में योग के प्रति आकर्षण बढ़ता जा रहा है। अमेरिका निवासी डा.माइकल बुश और उनकी पत्नी डा.पाइगी बुश वर्ष 1970 में पहली बार भारत आए तो योग के आकर्षण से नहीं बच पाए। यहां तीर्थनगरी ऋषिकेश स्थित महर्षि महेश योगी की चौरासी कुटिया में उन्होंने योग का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उन्होंने अपने गुरू महर्षि महेश योगी से भावातीत योग की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद महर्षि वैदिक यूनिवर्सिटी हॉलेंड से जुड़ कर उन्होंने योगाचार्य की उपाधि हासिल की। अब इसी यूनिवर्सिटी के माध्यम से वे विश्व भर में योग के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं।
बीते दिनों उत्तरकाशी आए बुश दंपत्ति ने यहां गजोली और कुंसी गांव में स्थित महर्षि आश्रमों में साधकों को योग के गुर सिखाए। सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित श्री विश्वनाथ संस्कृत महाविद्यालय पहुंचे इस दंपत्ति ने छात्रों को भावातीत योग के फायदे बताते हुए इसका प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने कहा कि भावातीत योग के माध्यम से शरीर निरोगी बनने के साथ ही व्यक्ति एकाग्रचित्त एवं तनावमुक्त रहता है। अगले महीने से वे ऋषिकेश स्थित चौरासी कुटिया में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में साधकों को योगाभ्यास कराएंगे।