हल्द्वानी में रविवार को आयोजित हो रहे किसान सम्मेलन के बहाने भाजपा किसानों के भले के साथ ही सियासी बला टालने की जुगत में भी है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह की उपस्थिति में 12 हजार किसानों को ऋण बांटा जाएगा।
विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार बड़े स्तर पर हो रही इस सभा को ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब भाजपा को हल्द्वानी में ही अंतरराज्यीय बस अड्डे के निर्माण रोकने को लेकर नेता प्रतिपक्ष और हल्द्वानी विधायक इंदिरा हृदयेश की भूख हड़ताल की धमकी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम हल्द्वानी के चुनाव भी सिर पर हैं और नगर निगम सीमा विस्तार में भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम सवालों का जवाब देने में भी उलझी हुई है।
खेती किसानी को लेकर भाजपा को विधानसभा चुनाव के बाद से ही कई तरह के सवालों का जवाब देना पड़ रहा है। हाल ही में हल्द्वानी में हुए प्रदेश भर के महिला संगठनों के सम्मेलन में महिला किसानों को खेती का मालिकाना हक देने की मांग उठी। इससे पहले नोटबंदी के बाद प्रदेश में एक के बाद एक किसानों की आत्महत्याओं ने भी सरकार को झकझोर दिया था। किसानों का सीधा वास्ता पलायन और कम होती उपज जैसे गंभीर मुद्दों से भी है और प्रदेश सरकार दोनों ही मुद्दों पर कोई ठोस कार्ययोजना सामने नहीं रख पाई है।
अब सहकारिता ऋण मेले में भीड़ जुटाने में कोई कोर कसर न छोड़ रही भाजपा की कोशिश एक तीर से कई निशाने साधने की है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत, सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत सहित अन्य नेताओं की उपस्थिति में हो रहे सम्मेलन केजरिए भाजपा किसान हित के प्रति गंभीर होने का संकेत देने की कोशिश में है। एक दूसरा संकट भी भाजपा के सामने है और उसका भी सीधा जुड़ाव हल्द्वानी से ही है।
हल्द्वानी विधायक और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश हल्द्वानी में गौला पार बन रहे अंतरराज्यीय बस अड्डे का निर्माण रोके जाने से खफा है। कांग्रेस के ठप्पे वाली इस परियोजना का काम एक महीने में शुरू न होने पर इंदिरा ने दस हजार लोगों के साथ भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी भी दी हुई है।
मुख्यमंत्री इस बस अड्डे को हल्द्वानी से बाहर न ले जाने की बात कह चुके हैं पर नई जमीन अभी तय नहीं हो पाई है। इसी तरह नगर निगम चुनाव की सियासी बला से भी भाजपा को पार पाना है। नगर निगम की सीमा विस्तार में 36 नए गांव शामिल किए गए हैं और इस सीमा विस्तार से ग्राम पंचायत प्रतिनिधि खुश नहीं हैं। कांग्रेस भी इस मुद्दे को लपक चुकी है।