कर्णप्रयाग के सुरेंद्र ने प्लास्टिक के डब्बों को पैर बनाया और फिर बड़े मंचों पर अपनी कला का लोहा मनवाया।
अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाहत है तो कोई बाधा आड़े नहीं आती है। कर्णप्रयाग के सिमली राड़खी के सुरेंद्र लाल ने भी कभी अपनी दिव्यांगता को अपने जीवन में बाधा बनने नहीं दिया। पोलियो से ग्रसित होने के बावजूद भी वह प्रसिद्ध लोक कलाकार हैं। सुरेंद्र पैरों में प्लास्टिक के डब्बों को लगाकर बड़े मंचों पर शानदार प्रस्तुति देते हैं।
कर्णप्रयाग से पांच किमी की दूरी पर स्थित सिमली राड़खी के सुरेंद्र लाल ने पांच साल में ही अपनी मां को खो दिया था। जन्म से ही पैरों से दिव्यांग होने की वजह से उनकी दुनिया कुछ अलग ही थी। पिता ने गरीबी के चलते जैसे-तैसे सुरेंद्र और उनकी दो बहनों का भरण पोषण किया।