चारधाम यात्रा मार्ग को हादसों से सुरक्षित करने के साथ ही इसे खूबसूरत बनाने की रणनीति केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने बदली है।
पहले चारधाम राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ पेड़ लगाए जाने की योजना थी, लेकिन अब यहां फूलों की घाटियां बनाई जाएंगी। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे की मिट्टी की किस्म और गुणवत्ता के लिहाज से यहां फूल लगाए जाएंगे। इसके लिए भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के साथ करार किया जा रहा है।
चारधाम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के 12 हजार करोड़ बजट की एक फीसदी धनराशि मार्ग के दोनों तरफ पौधारोपण के लिए निश्चित की गई है। चारधाम मार्ग पर कौन से पौधों का रोपण किया जाए, इसके लिए परियोजना के जिम्मेदारों ने वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) से पेड़ों के नामों की सूची मांगी थी।
इसके लिए एफआरआई से करार भी किया जा रहा था। लेकिन, अब कें द्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने अपना इरादा बदल दिया है। अब राजमार्ग के दोनों तरफ फूल लगाए जाएंगे। इससे एफआरई के बजाए भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के साथ करार किया जा रहा है।
चारधाम रूट की मिट्टी की किस्मों और यहां जल उपलब्धता की स्थिति की जांच मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान करके बताएगा कि किन प्रजातियों के फूल यहां लगाए जाएं। राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य के साथ ही यहां फूल लगने का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। संस्थान के अधिकारियों के साथ एमओयू के लिए चारधाम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के अधिकारियों की दो राउंड बैठक हो चुकी है।
पहले राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारों पर पेड़ लगाने की योजना थी। अब यहां खूबसूरत, मन को तरोताजा करने वाले फूल लगेंगे। इस संबंध में भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के साथ एमओयू साइन किया जा रहा है।
- पीके मौर्या, परियोजना निदेशक, चारधाम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना