फूलदेई छम्मा देई, दैंणी द्वार भर भकार... फूलदेई पर्व पर राजधानी दून में इन्हीं गीतों की गूंज सुनाई दी। बच्चों ने फूलदेई पर्व पर ये गीत गुनगुनाते हुए घरों की देहरी पर विभिन्न प्रकार के रंग बिरंगे फूल, चावल डाले। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास पर भी फूलदेई पर्व की धूम रही। वहीं शहरभर में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित कर पर्व मनाया गया।
बृहस्पतिवार को शहर में चैत्र माह के पहले दिन फूलदेई पर्व धूमधाम से मनाया गया। कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद गढ़ी शाखा की ओर से फूलदेई पर्व पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बच्चों ने आचार्य डॉ. बिपिन जोशी के घर की देहरी में फूल और अक्षत चढ़ाकर शुभारंभ किया। बच्चों ने फूलदेई छम्मा देई, जतुका द्येला उतुका सई, दैणी द्वार भर भकार, यो देली सौ बारंबार नमस्कार... गीत गाते हुए विभिन्न प्रकार के रंग बिरंगे फूल, चावल देहरी पर डाले। बबिता साह लोहनी ने बताया कि कूर्मांचल परिषद अपना हर पर्व पारंपरिक रूप से मनाते हुए आ रहा है और हमेशा यही प्रयास है कि अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाते रहें। इस दौरान बच्चों को गुड़, चावल, दक्षिणा आदि उपहार स्वरूप दी गई। धाद संस्था की ओर से फूलदेई पर्व पर दस हजार बच्चों के साथ माह भर चलने वाले कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसमें पहले दिन राजपुर रोड स्थित स्कूल में रंग-लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। वहीं शाम को दून लाइब्रेरी मे संस्था रूम टू रिड की सहभागिता के साथ क्लाइमेट चेंज के दौर में बच्चों के लिए जलवायु परिवर्तन पर तैयार की गई किताबों का लोकार्पण किया गया। संयोजक गणेश उनियाल ने कहा कि मार्च के बजाय जनवरी में ही बुरांश और अन्य फूलों के फूलना यह स्पष्ट तौर पर ग्लोबल वार्मिंग का मौसम परिवर्तन पर असर है। कोना कक्षा की सह-संयोजक आशा डोभाल ने कहा कि क्लाइमेट चेंज के दौर में फूलदेई पर लेखन, रंग और संवाद के साथ विभिन्न आयोजन होंगे। इस दौरान रूम टू रिड की ओर से तैयार की गई विभिन्न लेखकों की जलवायु परिवर्तन पर लिखी कहानियों की पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस अवसर पर संस्था की स्टेट हेड पुष्पलता रावत, धाद के सचिव तन्मय ममगाईं, प्रधानाध्यापक विजय लक्ष्मी, प्रतिमा सिंह, संगीता गुलाटी, मीनाक्षी देवी, नीना रावत, इंदु भूषण सकलानी, विजेंद्र रावत, सीमा कटारिया, डॉ विमल नौटियाल, शिव मोहन सिंह आदि मौजूद रहे।
लोकपर्वो का हमारे जीवन में विशेष महत्व : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री आवास पर लोकपर्व फूलदेई की धूम रही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिवार के साथ फूलदेई पर्व मनाया। यहां रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों ने देहरी में फूल व चावल बिखेरकर पारंपरिक गीत ''''फूल देई छमा देई, जतुक देला, उतुक सई, फूल देई छमा देई, दैंणी द्वार भर भकार'''' गाते हुए शुरुआत की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को फूलदेई पर्व शुभकामनाएं दी और बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि लोकपर्वों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है।