जब इरादे बुलंद हों तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं, यह कहावत नेपाल के पाल्पा जिले के छोटे से गांव देवगिरी से निकले पांच युवाओं ने सच कर दिखाई। हाथ में भारत और नेपाल का ध्वज थामे, पैरों में चप्पलें और दिल में अटूट विश्वास लिए ये युवा 480 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवप्रयाग पहुंचे, जहां से उनकी केदारनाथ यात्रा आगे बढ़ेगी।
इस अद्भुत यात्रा में शामिल राजा विश्वकर्मा (27), लालू (24), प्रयास सुनार (25), सूरज रतन (26) और सूर्य बहादुर (28) ने बताया कि उन्होंने यह सफर धर्म, दोस्ती और दो देशों के बीच प्रेम का संदेश देने के लिए शुरू किया था।
रास्ते में उन्होंने तेज बारिश, खड़ी चढ़ाइयां, जंगली रास्तों के खतरे और थकान झेली, लेकिन हौसला नहीं तोड़ा। राजा विश्वकर्मा ने मुस्कराते हुए कहा, कभी पैरों में छाले पड़ गए, लेकिन जब भारत की सीमा में हमें लोगों ने भाई कह कर गले लगाया, तो सारी थकान गायब हो जाती है। अब यह युवा देवप्रयाग से केदारनाथ के लिए रवाना हो चुके हैं।
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प्रयास सुनार ने कहा, हमारा सपना केदारनाथ के दरबार में दोनों देशों के झंडे लेकर पहुंचना है। हम चाहते हैं कि हमारी यह यात्रा युवाओं को प्रेरित करे कि असंभव जैसा कुछ नहीं होता। बताया कि 18 मार्च को उन्होंने सिर्फ 5 किलो का बैग (एक जोड़ी अतिरिक्त कपड़े, पानी की बोतल और फर्स्ट एड किट) लेकर यात्रा शुरू की थी। आज जब वह देवप्रयाग पहुंचे हैं तो उनके पास अनगिनत लोगों के आशीर्वाद और यादें हैं।