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Dehradun News: खैरना बैराज और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जलाशय प्रोजेक्ट समेत पांच प्रस्तावों को मंजूरी

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सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में प्रदेश के विकास से जुड़े पांच प्रस्तावों को वित्तीय मंजूरी प्रदान की गई। इनमें नैनीताल जिले का खैरना बैराज और देहरादून जनपद का श्यामा प्रसाद मुखर्जी जलाशय प्रोजेक्ट प्रमुख हैं। वहीं, तीन अन्य बड़े प्रस्तावों को आवश्यक समीक्षा के लिए आरक्षित रखते हुए विस्तृत सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं।
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बैठक में नैनीताल जिले में पेयजल की दीर्घकालिक समस्या को दूर करने के लिए प्रस्तावित 382.40 करोड़ रुपये की खैरना बैराज पेयजल परियोजना को स्वीकृति दे दी गई है। इस बैराज की जल धारण क्षमता 1.35 एमसीएम होगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत सिंचाई विभाग की 326.64 करोड़ रुपये की लागत वाली पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी जलाशय परियोजना (सहसपुर, देहरादून) को भी अनुमोदन मिल गया है। इसके तहत 73 मीटर ऊंचा और 115 मीटर लंबा बांध बनाया जाएगा। इसकी जल धारण क्षमता तीन एमसीएम होगी, जिससे पेयजल और कृषि सिंचाई, दोनों को सीधा लाभ पहुंचेगा। बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम और लोनिवि सचिव पंकज पांडेय समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
बागेश्वर में सर्किट हाउस और कैंची धाम बाईपास को भी मिली मंजूरी

व्यय वित्त समिति ने मुख्यमंत्री घोषणा के तहत बागेश्वर जिले में 13.15 करोड़ की लागत से सर्किट हाउस निर्माण को मंजूरी दी है। वहीं, लोनिवि की राज्य योजना के तहत नैनीताल विधानसभा क्षेत्र के बेतालघाट ब्लॉक में दुनिघाट से रातिघाट (पाडली) तक कैंची धाम बाईपास मोटर मार्ग के डामरीकरण और सुधारीकरण कार्य के लिए 21.81 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा, कुंभ मेला-2027 के लिए शहरी विकास विभाग और नगर निगम हरिद्वार की ओर से प्रस्तुत कंप्रिहेंसिव डेवलपमेंट ऑफ मैनपावर फॉर इंटीग्रेटेड सैनिटेशन ऑपरेशन के लिए 25 करोड़ और कुंभ की स्वच्छता व्यवस्था के लिए 25 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को भी अनुमोदन प्रदान किया गया है।
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बढ़ी हुई लागत का विस्तृत सत्यापन करे विभाग

बैठक में केदारनाथ धाम में समग्र आधारभूत संरचना, सबस्टेशन पैनल व अन्य कार्यों (पर्यटन और लोनिवि) के प्रस्ताव को आवश्यक समीक्षा के लिए आरक्षित रखा गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजना की बढ़ी हुई अतिरिक्त लागत का विस्तृत सत्यापन किया जाए। लागत वृद्धि के कारण और वास्तविक आवश्यकता का परीक्षण करने के बाद ही संशोधित प्रस्ताव लाया जाए। इसके अलावा सिंचाई विभाग की स्यूंसी झील निर्माण (बीरोंखाल) और रुद्रप्रयाग शहर के मास्टर प्लान फेज-एक से जुड़ी परियोजना की भी समीक्षा के निर्देश दिए गए।
भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बनें प्रस्ताव

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी परियोजना तैयार करते समय उसके सभी चरणों का विस्तृत अध्ययन किया जाए। परियोजनाओं की अनुमानित लागत तय करते समय वित्तीय प्रबंधन का विशेष ध्यान रखा जाए। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही प्रस्ताव तैयार हों, ताकि उनके विलंबित होने से लागत में अनावश्यक वृद्धि न हो।
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