दून महिला अस्पताल में एक महिला ने पांच किलो वजन वाले एक बच्चे को जन्म दिया है। बच्चे को लेकर डाक्टरों सहित अस्पताल के अन्य लोगों में कौतूहल बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि बच्चा इस अस्पताल में अब तक जन्म लेने वाले बच्चों में सबसे ज्यादा मोटा है। अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.अर्चना श्रीवास्तव का कहना है कि गर्भधारण के दौरान मां का ब्लड शुगर बढ़ जाने से गर्भस्थ शिशु का वजन बढ़ जाता है।
पटेलनगर निवासी शगुफ्ता की तीन दिन पहले दून महिला अस्पताल में सिजेरियन डिलिवरी हुई है। उन्हें अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में रखा गया है। नवजात के परिजन बच्चे की सेहत देखकर काफी खुश हैं, लेकिन डाक्टरों का कहना है कि ओवर वेट वाले बच्चे को रिस्क भी बहुत होता है। बच्चे को शुगर लेवल घटने की दिक्कत हाइपोग्लाइसीमिया हो सकती है। इससे बच्चे को थोड़ी-थोड़ी देर में फीड देना जरूरी होता है। कभी-कभी ड्रिप की भी नौबत आ जाती है।
डा. श्रीवास्तव ने बताया कि गर्भवती को अगर हाई ब्लडप्रेशर और हाई ब्लड शुगर है तो गर्भस्थ शिशु को यह दिक्कत हो जाती है। गर्भवती को हाई ब्लडप्रेशर होने से शिशु के अंग असामान्य रूप से बड़े होने लगते हैं। ब्लड शुगर में वजन बढ़ जाता है। बताया कि इस वक्त पांच से दस फीसदी गर्भवतियों को जेस्टेशनल डायबिटीज होती है। बिगड़ी लाइफ स्टाइल के कारण यह दिक्कत बढ़ रही है।
अधिक वजन के बच्चे को दिक्कतें
ब्लड शुगर लेवल अचानक नीचे आने से ब्रेन डैमेज हो सकता है
शरीर ठंडा पड़ने की दिक्कत हाइपोथर्मिया हो सकता है
शरीर के अंगों का समय से पहले विकास हो जाता है
बड़े होने पर हाइपरटेंशन और डायबिटीज हो सकती है
गर्भवती यह ध्यान रखें
गर्भ के चार हफ्ते से बराबर ब्लडप्रेशर चेक कराएं
गर्भधारण के दौरान बराबर ब्लड शुगर चेक कराएं
सुबह-शाम वॉक अवश्य करें
खानपान में एहतियात बरतें
ओवर वेट बच्चों के लिए एहतियात
बच्चों को तली-भुनी चीजों की आदत न डालें
बच्चों का मोटापा न बढ़ने दें
डाइटीशियन से सलाह कर उनका खानपान तय करें
बच्चों को व्यायाम के लिए प्रोत्साहित करें
बच्चे का वजन
ढाई किलो नार्मल वेट
सवा दो किलो से कम लो वेट
साढ़े तीन किलो से अधिक ओवर वेट