कोल इंडिया लिमिटेड और रेलवे से धोखाधड़ी एवं भ्रष्टाचार के मामले में आरोप साबित नहीं होने पर सीबीआई अदालत ने रेलवे के तीन अधिकारियों सहित पांच लोगों को बरी कर दिया। वहीं एक अन्य आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि 21 नवंबर 1999 को सीबीआई ने रेलवे और कोल इंडिया के छह लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया। आरोप है कि दो नवंबर 1999 को लक्सर (जनपद हरिद्वार) रेलवे स्टेशन पर सीबीआई व रेलवे अधिकारियों की संयुक्त टीम ने लीडो रेलवे स्टेशन से कोल लेकर डंडारीकला जाने वाली मालगाड़ी का आकस्मिक निरीक्षण किया।
नहीं साबित हो पाया आरोप
निरीक्षण के दौरान चार बोगियों में 424.8 टन अधिक कोयला पाया गया। जो कि प्रत्येक बोगी में औसत अनुपात क्षमता 58.8 टन से अधिक था। अधिक कोयले के कारण रेलवे को लगभग चार लाख रुपये की क्षति हुई। मामले में अधिकारियों ने रेलवे और कोल इंडिया लिमिटेड के कर्मचारियों, अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया।
यह भी आरोप लगा कि मालगाड़ी को निर्धारित गति से तेजी से ले जाने और लोक सेवक की हैसियत का दुरुपयोग कर रेलवे को 2,22,874 रुपये की हानि पहुंचाई गई। अभियोजन पक्ष किसी भी आरोप को कोर्ट में साबित नहीं कर पाया।
इन पर लगे आरोप
दीपक कुमार हजारिका (सीनियर गुड्स क्लर्क एनईएफ रेलवे लीडो आसाम), गोविंद चंद बासुमती (गुड्स ट्रेन ड्राईवर एनईएफ रेलवे तिनसुखिया), शिवा दत्ता (लोडिंग इंसपेक्टर एनईसी सीआईएल तिरप कोलरी आसाम), मोहन राव (आसाम) हरीश गुप्ता (प्रोपराइटर मैसर्स लोंगोवालिया कोल ट्रेडर्स डंडारीकला पंजाब) व एचसी कंसल (प्रतिनिधि मैसर्स लोंगोवालिया कोल ट्रेडर्स डंडरीकला पंजाब)