जुलाई के चार दिनों में मंगलवार की शाम तक करीब पांच लाख कांवड़िये गंगा जल भर कर लौट गए हैं। इस समय धर्मनगरी में तीन लाख कांवड़ियों का जमावड़ा है।
श्रावण मास का आगमन गुरुपूर्णिमा के बाद 28 जुलाई को हुआ था। उससे पहले हजारों कांवड़िये उत्तरकाशी और गंगोत्री से गंगा जल भर हरिद्वार में सावन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सावन लगते ही लगातार वापसी शुरू हो गई।
इस समय राजस्थान और मध्यप्रदेश के कांवड़िये लगभग लौट चुके हैं। जो रह गए हैं वे बुधवार तक निकल जाएंगे। पंजाब और हरियाणा के दूरस्थ भागों से कांवड़धारियों का आगमन इन दिनों चल रहा है। पंचक हटते ही हरियाणा, दिल्ली और यूपी के कांवड़ियों से गंगानगरी खचाखच भर जाएगी।
इस समय करीब तीन लाख कांवड़िये हरिद्वार से चलने की तैयारी में हैं। इनकी वापसी बुधवार सवेरे से शुरू हो जाएगी। तब तक लाखों और कांवड़िये नगर में पहुंच चुके होंगे। कांवड़ियों के आश्रय स्थल अभी भी खड़खड़ी तक ही बन पाए हैं। उससे आगे भूपतवाला और सप्तऋषि की ओर कांवड़ियों की भीड़ तीन जुलाई से बढ़ेगी।
चौथे दिन तक कांवड़ का मेला बहुत शांति पूवर्क चला है। आमतौर पर यूपी और हरियाणा के भारी संख्या में आगमन के बाद तनावपूर्ण दौर शुरू होता है। हरकी पैडी के मालवीय द्वीप पर कांवड़िये अपनी कांवड़ भरते हुए नजर आएंगे। कांवड़ का मेला अब धीरे-धीरे परवान चढ़ने वाला है।