उत्तराखंड में मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा दे दिया गया है। इससे प्रदेश के मत्स्य पालकों और मछुआरा समुदाय के लोगों को कई तरह की रियायत मिलेगी।
मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा मिलने से आयकर के मद में छूट मिलने के साथ-साथ मत्स्य पालकों को रियायती दर पर बिजली मिल सकेगी। प्रदेश के मत्स्य पालक लंबे समय से यह मांग करते आ रहे थे कि मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा दिया जाए।
यूपी में भी मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा हासिल है। इस संबंध में मत्स्य विभाग की ओर से एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इस फैसले से प्रदेश के लगभग आठ हजार मछली पालकों को लाभ मिलेगा। प्रदेश में अभी मछली का उत्पादन 4200 टन प्रतिवर्ष के स्तर पर है। इसे 2020 तक बढ़ाकर आठ हजार टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।