अभी 15 से 20 मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण देने की योजना है। अगर प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में और भी मत्स्य पालकों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वह लोग भी लाभ ले सकते हैं, जो मत्स्य पालन नहीं करते हैं। इसका अचार और पापड़ बनाकर बाजार के अलावा होटलों और रिजॉटों में भी बेचा जाएगा। बगड़वाल के अनुसार मछली का अचार चार सौ से साढ़े चार सौ रुपये किलो तक आसानी से बिक जाएगा, जिससे मत्स्य पालकों की आय बढ़ेंगी।
सेहत के लिए फायदेमंद होगा अचार, पापड़
मत्स्य विभाग निरीक्षक कुंवर सिंह बगड़वाल ने बताया कि मछली के अचार और पापड़ स्वाद बढ़ाने के साथ कोलस्ट्राल कम करने, आंखों की रोशनी और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने में भी फायदेमंद होते हैं। इसका प्रयोग कुमाऊं में सिर्फ नैनीताल जिले में ही पहली बार किया जा रहा है।