देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्युआईआई) में देश का पहला टाइगर सेल स्थापित किया गया है।
इससे देश में बाघों के संरक्षण की कार्ययोजना को मजबूती मिलेगी। टाइगर सेल में बाघों का डीएनए बैंक भी स्थापित किया गया है। इसमें देश के सभी 50 टाइगर रिजर्व के बाघों के डीएनए सैंपल उपलब्ध रहेंगे। वन्य जीव तस्करों के पास से खालें बरामद होने पर यहां से यह पता लगाया जा सकेगा कि बाघ किस क्षेत्र का रहा है।
केंद्र सरकार के निर्देश पर भारतीय वन्य जीव संस्थान और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से टाइगर सेल की स्थापना की है। टाइगर सेल पहली बार देश भर के बाघों का डाटा बेस तैयार कर रहा है। डीएनए बैंक में देश के अधिकांश क्षेत्रों के बाघों के डीएनए सैंपल जमा कर लिए गए हैं। बाघों के संरक्षण के साथ टाइगर सेल वन्य जीव आरक्षित क्षेत्रों में विकास कार्यों का रोड मैप भी तैयार करेगा।
टाइगर सेल के रोड मैप से ही तय होगा कि क्षेत्र में कहां-कहां और किस हद का विकास कार्य कराए जा सकते हैं। सेल की संस्तुति के बाद वन्य जीव आरक्षित क्षेत्रों में किसी भी कार्य की अनुमति दी जाएगी। बाघों की खाल पकड़े जाने पर प्रदेश अब एक-दूसरे पर जिम्मेदारी नहीं डाल पाएंगे। खाल से लिए गए सैंपल से बाघ का क्षेत्र तय होने के बाद वन्य जीव तस्करों के खिलाफ प्रभावी रणनीति बनाई जा सकेगी।
इससे बाघों पर शोध कर रहे विज्ञानियों को भी आसानी होगी। उन्हें एक ही स्थान पर देश के सभी टाइगर रिजर्व के बाघों की जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। टाइगर सेल को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण फंड उपलब्ध कराएगा। टाइगर सेल में वरिष्ठ वन्य जीव विज्ञानी डा. वाईवी झाला की अगुवाई में पांच विज्ञानी कार्य कर रहे हैं।
टाइगर सेल का उद्घाटन शनिवार को
भारतीय वन्य जीव संस्थान में स्थित टाइगर सेल का विधिवत उद्घाटन शनिवार को होगा। इस मौके पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के अध्यक्ष बिशन सिंह बोनाल भी मौजूद रहेंगे। संस्थान के निदेशक डा. वीबी माथुर ने बताया कि सेल ने काम तो पहले से ही शुरू कर दिया है। इसका विधिवत उद्घाटन शनिवार को होगा।