रमजानुल मुबारक आ गया है। शनिवार से रमजान में पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज तरावीह की शुरुआत हो गई। रविवार को पहला रोजा रखा जाएगा। आसमान साफ होने की वजह से लोगों को रमजान का चांद नजर आया। बड़ों और बच्चों ने घरों की छतों पर जाकर चांद का दीदार किया।
लोगों ने आतिशबाजी की और एक दूसरे को गले लगाकर रमजान के आमद की मुबारकबाद दी। लोगों ने बाजारों में सहरी और इफ्तार के लिए सिवईं, दूध, खजूर आदि की खरीदारी की।
अरबी कलंडर के नवें महीने रमजान की रविवार को पहली तारीख है। शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी और मुफ्ती-ए-आजम देहरादून मुफ्ती सलीम अहमद ने बताया कि मस्जिदों में तरावीह का सिलसिला शुरू हो गया है। इसमें 20 रकात नमाज-ए-तरावीह हर रोज अदा की जाती है। रमजान के रोजे हर बालिग मर्द और औरत पर फर्ज है।
रोजे का असल मकसद भूखा रहना नहीं अपनी नफ्स (इच्छाओं) पर काबू रखना है। रोजे की हालत में चुगलखोरी, झूठ, झगड़ा समेत सभी बुरे कामों से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि मुस्लिमों को रमजान अपने रब की खूब इबादत करनी चाहिए। इस माह में हर अच्छेे काम का सवाब सत्तर गुना अधिक मिलता है।