समिट में सरकार ने हेली कंपनियों को उड़ान योजना के तहत हेली सेवाएं संचालित करने का ऑफर दिया है। सरकार सहस्त्रधारा हेलीपैड स्थित हेली ड्रोम को पीपीपी मोड देने के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगी। सरकार ने इच्छुक कंपनियों से टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने को कहा है। प्रदेश में वर्तमान में 51 हेलीपैड, एक एयरपोर्ट, एक हवाई पट्टी है। सी प्लेन के लिए टिहरी में वाटर एयर ड्रोम विकसित किया जा रहा है। सरकार ने हेली ऑपरेटरों को अवगत कराया कि प्रदेश में सालाना औसतन 2 लाख लोग हेली सेवा की सुविधा ले रहे हैं।
केंद्र उठाएगा हेलीपोर्ट बनाने का खर्च, राज्य सरकार को देनी होगी जमीन
पर्वतीय राज्यों में हेली कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए अवस्थापना विकास (इंफ्रास्टेक्चर) पर ज्यादा फोकस करना होगा। पहाड़ों में दुर्गम इलाकों में यातायात का सबसे ज्यादा प्राथमिकता वाला साधन हेलीकॉप्टर हो सकता है। इसके लिए पहाड़ों में एयरपोर्ट के बजाए हेलीपोर्ट विकसित करने होंगे। राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराए तो हेलीपोर्ट विकसित करने का खर्च केंद्र उठाएगा। एक हेलीपोर्ट निर्माण के लिए करीब 8 से 10 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने हेलीकाप्टर समिट में यह बात कही।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
हेलीकॉप्टर समिट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव प्रदीप सिंह खरोला, संयुक्त सचिव उषा पाधी, प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, मेयर सुनील उनियाल गामा, एयरबस इंडिया के चेयरमैन एवं फिक्की के सिविल एविएशन के चेयरमैन आनंद स्टेनले, लाल बहादुर शास्त्री अकादमी मसूरी के निदेशक संजीव चोपड़ा, प्रदेश नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव दिलीप जावलकर, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष आरके जैन, यूकाडा की सीईओ सोनिया समेत हेली निर्माता, ऑपरेटर्स और स्टेक होल्डर मौजूद थे।