अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम को गैरसैंण विधानसभा में स्वीकृति के साथ ही फायरकर्मियों को कार्रवाई का कानूनी अधिकार मिल गया है। अब तक फायर बिग्रेड के नोटिसों को कानूनी मान्यता नहीं थी। लिहाजा नोटिसों को तवज्जो नहीं दी जाती थी। लेकिन अब समुचित फायर यंत्र नहीं रखने वाले संस्थानों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीधी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें जुर्माने के साथ छह माह तक सजा का भी प्रावधान है।
उत्तराखंड को राज्य का दर्जा मिलने के बाद से फायर विभाग का एक्ट नहीं बन पाया था, लिहाजा फायरकर्मियों को दमकल के नियमों का अनुपालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार नहीं था। फायरकर्मी सिर्फ आग बुझाने और रिपोर्टिंग तक ही सीमित थे। जिला प्रशासन, पुलिस और एमडीडीए उनकी रिपोर्ट पर कार्रवाई अमल में लाती लाते थे। 2013 में उत्तराखंड अग्निशमन, आपात सेवा अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम बनकर तैयार हो हुआ। लेकिन इस पर शासन की मुहर का इंतजार था।
शुक्रवार को गैरसैंण विधानसभा सत्र में फायर अधिनियम को मंजूरी दे दी गई। फायर बिग्रेड के डिप्टी डायरेक्टर एसके शर्मा बताते हैं कि अब फायरकर्मियों को कानूनी अधिकार मिल गए हैं। फायर यंत्रों की समुचित व्यवस्था नहीं करने वालों पर पर सीधे जुर्माना किया जा सकता है। यदि उसके बाद कोई हादसा होता है तो संबंधित के खिलाफ मजिस्ट्रेट को फायर ब्रिगेड चालानी रिपोर्ट भेज सकता है। अधिनियम के तहत आरोपी को छह माह तक की सजा हो सकती है। साथ ही अब बड़े संस्थानों, माल संचालकों और 750 के करीब हाउसिंग सोसायटी को अनिवार्य रूप से फायर अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी।
अब नियम बनेंगे
विधानसभा में अग्नि सुरक्षा अधिनियम को स्वीकृति मिलने के बाद अब नियम तैयार करने पर फोकस रहेगा। अगले एक दो माह में यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। पावर के साथ फायर का स्टाफ और उपकरण में बढ़ोतरी भी होगी। -एसके शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर फायर बिग्रेड