अपात्र कंपनी को खतरनाक कूड़े के निस्तारण का ठेका देने के मामले में सीबीआई ने भेल कि तीन अफसरों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच के लिए सीबीआई की टीम ने भेल में डेरा डाल दिया है। सीबीआई के डेरा डालने के बाद भेल के अधिकारियों में हड़कंप मचा है।
बताया जाता है कि मामला वर्ष 2014-2015 का है। भेल के कारखाने से निकलने वाले खतरनाक कूड़े को उठाने के लिए 46 लाख का ठेका अफसरों ने एक ऐसी कंपनी को दे दिया जो इस कार्य के लिए पात्र ही नहीं थी।
तीन माह में कूड़े का निस्तारण करना होता है। जितना कूड़ा उठना बताया गया उतना कूड़ा असल में था ही नहीं। आरोप है कि रकम भी कंपनी को एक सप्ताह में अदा कर दी गई। बताया जाता है कि इस मामले में सीबीआई ने देहरादून में पिछले माह सात अप्रैल को एफआईआर दर्ज की थी। मामले की पूरी जांच के लिए सीबीआई ने अब भेल में डेरा डाला है।
जानकारी के अनुसार सीबीआई ने रिटायर हो चुके तत्कालीन जीएम आरयू प्रसाद, वर्तमान एजीएम वीके सक्सेना, सीनियर मैनेजर ए भाई सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है।
कूड़ा उठाने वाली कंपनी भारत रेडियो एंड इलेक्ट्रिक वर्कस के प्रोपराइटर वीरेंद्र शर्मा और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। भेल का पक्ष जानने के लिए जब स्थानीय स्तर पर कुछ अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो कोई कुछ बोलने को राजी नहीं हुआ।