थानो-रायपुर मार्ग पर बने भोपालपानी पुल के मामले में चार अभियंताओं को निलंबित करने के बाद अब शासन मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रहा है। शासन ने तकनीकी जांच में सामने आए इस तथ्य को बेहद गंभीरता से लिया है कि बगैर स्ट्रक्चरल डिजाइन के ही पुल का निर्माण कर दिया गया। पुल की दबाव झेलने की क्षमता मानकों से आधी भी नहीं है।
अपर मुख्य सचिव (लोनिवि) ओम प्रकाश के मुताबिक मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान पुल निर्माण में लापरवाही पाई थी। उनके आदेश पर मुख्य अभियंता सतेंद्र शर्मा और तकनीकी सलाहकार राजेंद्र प्रसाद भट्ट को जांच सौंपी गई थी।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि पुल निर्माण में इस्तेमाल किया गया डिजाइन स्ट्रक्चरल का नहीं था। यह डिजाइन कुरुक्षेत्र इंजीनियरिंग कॉलेज के सिविल डिजाइन विभाग से तैयार कराया गया था। सिविल डिजाइन के विभागाध्यक्ष ने जांच टीम को बताया कि उनके द्वारा पुल का संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) नहीं, बल्कि वाह्य आकृति को डिजाइन किया गया। डिजाइन में लापरवाही बरतने के अलावा खराब गुणवत्ता की निर्माण सामग्री इस्तेमाल होने की पुष्टि हुई।
मैटेरियल टेस्टिंग देश की प्रतिष्ठित संस्था शिवराम इंस्टीट्यटू ऑफ इंडस्ट्रियल रिसर्च नई दिल्ली से कराई गई थी। इन वजहों से दोषी अधिकारियों को निलंबित किया गया। उन्होंने सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की।
बेकार हो 1.20 करोड़ रुपये
तकनीकी जांच के बाद आकलन किया गया है कि पुल निर्माण में बरती गई लापरवाही के चलते 1.20 करोड़ रुपये बेकार हो गए। डिजाइन और सामग्री की गुणवत्ता में लापरवाही बरतने के कारण सुरक्षा के मानकों की अनदेखी अलग से हुई। इसे शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। इस पुल के निर्माण में कुल 8.85 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
पुल सुधारीकरण की दोबारा जांच होगी
पुल निर्माण में गड़बड़ी पाए जाने के बाद कार्यदायी एजेंसी ने सुधारीकरण को लेकर जो लीपापोती की है, शासन उसकी भी जांच कराएगी। पुल को दबाव क्षमता और सुरक्षा मानकों की कसौटी पर कसा जाएगा और उस हिसाब से उसे तैयार किया जाएगा।
यह गंभीर लापरवाही का मामला है। न्यायालय ने सड़क सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश दिए हैं, उसी क्रम में इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, ताकि भविष्य में ऐसी गलती न दोहराई जाए। इस मामले में सरकार मुकदमा दर्ज करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।
- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव, लोनिवि